थकान से जमा लैक्टेट में कैंसर के इलाज की संभावनाएं, लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी ने किया खुलासा

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Edited By Muskan Dixit
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लैक्टेट हृदय रोग से सुरक्षा तो कैंसर कोशिकाओं की करता है मदद

लखनऊ, अमृत विचार: अत्यधिक थकान में मांसपेशियों में जमा होने वाले लैक्टेट में कैंसर के इलाज की संभावनाएं छिपी हैं। लैक्टेट रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ मस्तिष्क के लिए सुरक्षा कवच भी बनाता है, लेकिन कैंसर और स्ट्रोक को बढ़ावा देता है। ये आश्चर्यजनक परिणाम आए लखनऊ विश्वविद्यालय की वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा साहू के शोध में सामने आए हैं। साहू के अनुसार लैक्टेट में कैंसर के खिलाफ लड़ाई के सूत्र भी छिपे हुए हैं। लैक्टेट के साथ क्रिया करने वाले एंजाइम्स का अध्ययन करना होगा, ये कैंसर कोशिकाओं को मिलने वाले पोषण को रोक सकते हैं।

अभी तक ये समझा जाता रहा है कि केवल मांसपेशियों की थकान के कारण लैक्टेट निर्माण होता है। इस शोध के बाद मेडिकल साइंस में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। शोध में सामने आया है कि लैक्टेट केवल थकान का संकेतक नहीं, बल्कि एक सिग्नलिंग मॉलीक्यूल है। ये मेटाबॉलिज़्म, रोग प्रतिरोधक प्रणाली, मस्तिष्क क्रिया और आंतों की सूक्ष्मजीव समुदाय (गट माइक्रोबायोटा) को आपस में जोड़ता है। इस अध्ययन की सबसे खास बात है लैक्टेट के विरोधाभासी गुणों पर किया गया खुलासा। एक ओर यह कैंसर और स्ट्रोक जैसी बीमारियों को बढ़ावा देता है, वहीं नियंत्रित स्तरों पर यह मस्तिष्क की रक्षा करता है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मज़बूत बनाता है और सहनशक्ति बढ़ाता है।

कैंसर चिकित्सा के लिए उम्मीद

डॉ. नेहा साहू ने बताया कि वॉरबर्ग इफ़ेक्ट के तहत लैक्टेट अणु कैंसर कोशिकाओं को ऊर्जा देता है। नियंत्रित मात्रा में वही अणु मस्तिष्क की रक्षा, प्रतिरक्षा को सशक्त और शारीरिक क्षमता को बेहतर बनाता है। आंतों में लैक्टेट का उपभोग करने वाले गट बैक्टीरिया स्वास्थ्य को सुधारने के लिए प्रोबायोटिक और आहार संबंधी नए उपायों का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। यह शोध लैक्टेट को एक “आशा के अणु” के रूप में देखता है जिसमें अधिक मात्रा में यह हानिकारक है तो संतुलन में यह कैंसर, संक्रमण, चयापचय (मेटाबॉलिक) और तंत्रिका संबंधी रोगों के इलाज की नई संभावनाएँ खोल सकता है।

शोध में इन्होंने लिया हिस्सा

एमोरी यूनिवर्सिटी (अमेरिका) के डॉ. सुधीर कुमार, लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा साहू, इमाम मोहम्मद इब्न सऊद इस्लामिक यूनिवर्सिटी (सऊदी अरब) के डॉ. तल्हा जावेद, यूनिवर्सिटी टेक्नोलॉजी मारा (मलेशिया) के डॉ. हनीश सिंह जयसिंह चेल्लमल और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल (अमेरिका) के डॉ. प्रभात उपाध्याय (संपर्क लेखक) की टीम का समीक्षा शोध फ्रंटियर्स ऑफ फिजियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। जिसका शीर्षक है ड्यूल रोल ऑफ लैक्टेट इन ह्यूमन हेल्थ एंड डीसीज।

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