छठ महापर्व की धूमधाम: आस्था में डूबे घाट...महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य, दीपों और आतिशबाजी से जगमगाया
बाराबंकी, अमृत विचार। आस्था, परंपरा और उल्लास के रंग में सोमवार दोपहर बाद से ही पूरा जिला छठ की छटा में डूब गया। छठ मइया के जयघोष और गीतों की मधुर धुनों से नदी के घाट और तालाबों पर भक्तिमय वातावरण छा गया। लाल-पीली साड़ी में सोलह श्रृंगार किए महिलाएं, मांग से नाक तक भरा सिंदूर और हाथों में पूजा का दऊरा लेकर घाटों की ओर उमड़ती रहीं। रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट सहित शहर के प्रमुख तालाबों पर दीपों और गन्ने की बेदियों से सजे पूजा स्थल आकर्षण का केंद्र बने रहे।
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छठ मइया के गीतों करिहा क्षमा छठि मइया भूल चूक गलती हमार...की गूंज के बीच व्रती महिलाओं ने घुटने भर पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। पूजन के दौरान महिलाओं ने पांच परिक्रमा कर दीप प्रवाहित किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। घर से दूर रहने वालों को परिजन वीडियो कॉल के जरिए पूजा में शामिल करते दिखे। श्रद्धालु एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवाते और आस्था के इन पलों को अपने मोबाइल में कैद करते रहे। पूजा संपन्न होते ही पूरा परिसर दीपों और आतिशबाजी से जगमगा उठा।
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विश्व हिंदु परिषद जिलाध्यक्ष रामनाथ मौर्य के घर पर जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत पहुंचीं और पूजा में शामिल हुईं। वहीं नागेश्वरनाथ सरोवर रंग-बिरंगी रोशनी और फव्वारे की झिलमिलाहट से शहरवासियों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहां छठ पूजा के दौरान एसपी अर्पित विजयवर्गीय, एसडीएम आनंद तिवारी, सीओ सिटी संगम कुमार महिला थानाध्यक्ष मुन्नी सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष शीला सिंह व पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र वर्मा सहित कई अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। आस्था और उत्साह के इस पर्व में श्रद्धा, संस्कृति और सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला।
लोकगीतों से गूंजा नागेश्वरनाथ परिसर
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छठ पूजा के पावन अवसर पर सोमवार की गोधूलि बेला में नागेश्वरनाथ सरोवर परिसर भक्ति, संगीत और आस्था से सराबोर हो उठा। जैसे ही सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ा, वैसे ही तालाब परिसर में छठ मइया के लोकगीतों की स्वर लहरियां गूंजने लगीं। पूर्वांचल और मिथिलांचल की संस्कृति की झलक दिखाते पारंपरिक लोकगीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अन्न से भरल रहे घरवा दुअरवा पुत्र से गांव समाज..., हे छठी माता, पुत्री के भरल रहे मांग के सिंदूरवा..., और का चाही बांस के बहंगिया, महंगी लचकत जाए... जैसे गीतों की गूंज से श्रद्धालु झूम उठे। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी, सिर पर दऊरा रखे, घाट पर पहुंचकर लोकगीतों के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करती रहीं।
ग्रामीण अंचलों में भी छठ की उमंग
महापर्व छठ पूजा की आस्था और उल्लास का रंग सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी इसकी धूम देखने को मिली। सोमवार को दिनभर व्रती महिलाओं ने छठ मइया की पूजा के लिए श्रद्धा और परंपरा से जुड़े प्रसाद तैयार किए। गेहूं, घी और शक्कर से बने ठेकुआ, चावल और घी के लड्डू, तथा सेब, केला, अमरूद, नींबू सहित विभिन्न फल प्रसाद के रूप में सजाए गए बांस के बने सूप-डाला, दौरा और टोकरी में सुसज्जित किए गए। शाम होते ही गांव-गांव में श्रद्धालु परिवार घाटों और तालाबों की ओर उमड़ पड़े।
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सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के तेलवारी घाट पर बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं और पुरुषों ने एक साथ पूजा-अर्चना की और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं मरौचा बहटाई ड्रेन पर भी छठ व्रतियों ने परंपरागत रीति से अर्घ्य दिया। हैदरगढ़ क्षेत्र के बहुताधाम के विक्रम बत्रा अमृत सरोवर और सागरा मंदिर पोखरा सरोवर में महिलाओं ने संध्या के समय विधिवत पूजन किया।
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इसी तरह रामनगर के बिछलखा, देवा के नुमाइश मैदान स्थित तालाब व मसौली क्षेत्र के धरौली, बसंतनगर और इंधौलिया गांवों में महिलाओं ने कृत्रिम तालाब बनाकर छठ मइया का पूजन किया। निंदूरा क्षेत्र के दौलतपुर और बैना ताला गांव स्थित तालाबों पर भी श्रद्धालु महिलाओं ने पारंपरिक गीतों की गूंज के बीच सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया।
कल उगते सूर्य को अर्घ्य देंगी व्रती महिलाएं
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महापर्व छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण कल तड़के संपन्न होगा। उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के लिए छठ व्रती महिलाएं भोर से पहले ही अपने परिजनों के साथ घाटों पर पहुंचेंगी। सुबह के समय जब सूर्य की पहली किरण जल पर पड़ेगी, तब व्रती महिलाएं अर्घ्य अर्पित कर सूर्यदेव से परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करेंगी। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला कठिन व्रत संपन्न होगा, जिसे पारण के साथ पूरा किया जाएगा।
