लाखों की ईईजी मशीन ही मिर्गी की शिकार.... जिला अस्पताल में डेढ़ साल से बंद कमरे में फांक रही धूल
अयोध्या, अमृत विचार : जिला अस्पताल में मिर्गी और दीमागी बीमारियों की जांच के लिए दो साल पहले लगी इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) मशीन मुश्किल से 50 मरीजों की जांच कर पाई और डेढ़ साल से बंद कमरे में धूल फांक रही है। करीब तीन लाख रुपये की यह मशीन सरकारी लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है।
तत्कालीन सीएमएस डॉ. बृज कुमार के कार्यकाल में 2023 में यह ईईजी मशीन अस्पताल में इंस्टॉल की गई। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कॉर्पोरेशन ने बिना किसी प्लानिंग के मशीन भेज दी। टेक्नीशियन का इंतजाम तक नहीं किया।
संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई एनएचएम के नॉन-मेडिकल कर्मचारी अनूप कनौजिया को। इन्हें ट्रेनिंग के लिए भेजा गया, लेकिन महज एक हफ्ते की ट्रेनिंग में क्या सीखा जा सकता है? अनूप ने जो थोड़ा-बहुत समझा, उसी आधार पर मशीन चलाई। परिणाम सही नहीं आ रहे थे। इसके बाद मानसिक विभाग के चिकित्सक डॉ. शिशिर वर्मा ने रिस्पॉन्स न मिलने पर जांच बंद करा दी। मशीन को कमरे में बंद कर दिया गया, जहां अब धूल की मोटी परत जमा हो चुकी है। यह कोई पहली घटना नहीं। अयोध्या जिला अस्पताल की लापरवाही की फेहरिस्त लंबी है।
इससे पहले जिला अस्पताल में डेंटल लैब के निर्माण के लिए करीब 15 लाख का सामान भेज दिया गया। वह भी आज बंद कमरे में जंक खा रहा है। कई वरिष्ठ अधिकारी तो ईईजी मशीन के अस्तित्व से ही अनजान हैं। मरीज, खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब लोग, मिर्गी की जांच के लिए प्राइवेट क्लीनिकों के चक्कर काटते हैं। जहां हजारों रुपये खर्च होते हैं। इस संबंध में डॉ. शिशिर वर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं लगा।
ईईजी मशीन होने की जानकारी है। इस समय कमरे में बंद है। टेक्निशियन नहीं है, लेकिन बीच में संचालन हुआ था। अब क्यों बंद हो गई है। इसके बारे में बुधवार को पता कराता हूं।
-डॉ. अजय चौधरी, चिकित्सा अधीक्षक।
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