नैनीताल: शेरवुड के वर्चस्व की लड़ाई में लखनऊ डायसिस भी कूदा
तनुज पांडे, नैनीताल। उत्तराखंड में नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज का विवाद नए मोड़ पर आ गया है। उच्च न्यायालय में डायसिस ऑफ आगरा व नए अंतरिम प्रिंसिपल और वर्तमान प्रिंसिपल अमनदीप संधू के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल ही रही थी कि डायसिस ऑफ लखनऊ ने भी उच्च न्यायालय में इंटरवेंशन याचिका दायर कर …
तनुज पांडे, नैनीताल। उत्तराखंड में नैनीताल के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज का विवाद नए मोड़ पर आ गया है। उच्च न्यायालय में डायसिस ऑफ आगरा व नए अंतरिम प्रिंसिपल और वर्तमान प्रिंसिपल अमनदीप संधू के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल ही रही थी कि डायसिस ऑफ लखनऊ ने भी उच्च न्यायालय में इंटरवेंशन याचिका दायर कर मामले को गर्मा दिया है।
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले फील्ड मार्शल सैम माणिक शौ, प्रथम परमवीर चक्र विजेता शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा, कबीर बेदी, राम कपूर आदि असंख्य नामी हस्तियों को शिक्षा दे चुका शेरवुड इन दिनों चर्चाओं में है। इस स्कूल पर अब तक डायसिस ऑफ आगरा का कब्जा था और उन्होंने 2004 से 21 अक्टूबर 2020 तक अमनदीप संधू को प्रिंसिपल के रूप में रखा था। इसके बाद अचानक 21 अक्टूबर को डायसिस ऑफ आगरा ने संधू को हटाकर पीटर धीरज इमेनुएल को शेरवुड का अंतरिम प्रिंसिपल बना दिया।
जब पीटर शेरवुड स्कूल में चार्ज लेने पहुंचे तो उन्हें स्कूल के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया। अंतरिम प्रिंसिपल पीटर ने स्कूल में प्रवेश करने के लिए सुरक्षा मांगते हुए उच्च न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने सरकार से कहा और उन्हें सुरक्षा मिल भी गई लेकिन वो डायसिस के वेस्ट यूपी और उत्तराखंड चेयरमैन, सलाहकार, अधिवक्ता के साथ भी प्रवेश नहीं कर सके।
डायसिस ऑफ आगरा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर शेरवुड के प्रिंसिपल अमनदीप संधू को हटाकर उनके द्वारा नवनियुक्त अंतरिम प्रिंसिपल पीटर धीरज इमेनियुल को प्रिंसिपल काबिज कराने की प्रार्थना की है। इसी बीच पहले से संपत्ति पर दावा कर रही डायसिस ऑफ लखनऊ ने भी इंटरवेंशन याचिका डाल उन्हें भी सुनने की अपील कर दी है। गुरुवार को मामले में उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी रही।
‘चर्च ऑफ इंडिया’ के बिशप विजय मंतोड़े के विधिक सलाहकार और पैरोकार राकेश सोबती ने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 2010 में डायसिस ऑफ लखनऊ और लखनऊ डायसियन ऑफ ट्रस्ट एसोसिएशन के चेयरमैन को ही बिशप माना, जो आज भी प्रभावी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह समिति ही केवल पंजीकृत है, बाकी सब अवैध कब्जेधारी हैं। वहीं नगर के प्रतिष्ठित एक अन्य कॉलेज में भी स्टाफ में भी डायसिस का कब्जे के आरोप लगाए। इस दौरान लखनऊ डायसिस इलाहबाद उच्च न्यायालय के फैसले की कॉपी लेकर आया था ।
