29 और भेड़ों ने तोड़ा दम..., वजह स्पष्ट नहीं, बिसरा सुरक्षित
लखनऊ, अमृत विचार : मडियांव क्षेत्र के ग्राम घैला में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के पास सोमवार शाम को उपचार के दौरान 29 और भेड़ों की मौत हो गई। इससे पहले 71 भेड़ों की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। इन 100 भेड़ाें की मौत फेंके गए खाना खाने से हुई है या फिर और जहरीले पदार्थ से ये पोस्टमार्टम में स्पष्ट नहीं हो पाया है। पशु चिकित्सकों के दल ने बिसरा सुरक्षित कर लिया है। देर रात शवों को दफनाकर अन्य भेड़ों को पशुपालक के साथ उसके घर फतेहपुर भेज दिया गया।
जिला फतेहपुर के चरवाहा विजय पाल, शिवरतन पाल, प्रदीप कुमार भेड़ चराते हुए पहली बार लखनऊ आए। बताया कि यहां के ग्राम घैला में डेरा डाला। भेड़ों को चरने के लिए राष्ट्र प्रेरणा स्थल के पास छोड़ दिया। 25 दिसंबर को प्रेरणा स्थल के लोकार्पण के दिन खराब खाना पार्किंग के पास फेंका गया था जो सोमवार को उनकी भेड़ों ने खा लिया और पेट फूलने से 71 की मौत हो गई। इस घटना से हड़कंप मच गया। जानकारी पर पुलिस, प्रशासन और पशुपालन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार के नेतृत्व में तीन चिकित्सकों की टीम ने बीमार 125 भेड़ों का उपचार किया। देर शाम इनमें भी 29 की भी मौत हो गई।
चिकित्सकों के अनुसार भेड़ाें की मौत प्वाइजन से हुई है। लेकिन, फूड प्वाइजन से या फिर जहरीला पदार्थ खाने से या तालाब में मिला कीटनाशक पानी पीने से यह स्पष्ट नहीं है। चिकित्सकों ने कुछ का पोस्टमार्टम करके बिसरा सुरक्षित कर लिया है। इसके परीक्षण से स्थिति साफ होगी। वहीं, देर रात पुलिस, प्रशासन, नगर निगम और पशुपालन विभाग की टीमों ने शवों को दफना दिया। चरवाहा समेत शेष भेड़ों का उपचार करके नगर निगम के वाहनों से फतेहपुर भेज दिया।
पालकों को मिला 8.70 लाख मुआवजा, भेजी जांच रिपोर्ट
भेड़ों की मौत का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया था और पीड़ितों को 10 हजार रुपये प्रति भेड़ देने की घोषणा की थी। इस क्रम में सोमवार रात विधायक और प्रशासन ने प्रदीप, विजय और शिवरतन को 8.70 लाख रुपये मुआवजा की चेक दी। वहीं, शासन ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए थे। इस क्रम में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी स्तर से घटना की जांच कराई। मंगलवार को शासन रिपोर्ट भेज दी गई।
एक दिन पहले बना था खाना
विभागीय चर्चा रही कि 25 दिसंबर को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण था। कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए एक दिन पहले लंच पैकेट बनवाए गए। जिसकी गुणवत्ता कुछ लोगों ने खराब बताई और पैकेट पार्किंग के पास फेंक दिए। और चार-पांच दिन बाद वही खाना खाने से भेड़ों की मौत हो गई। जानकारों का यह भी कहना है खराब खाना खाने से एक साथ और इतनी तेजी से पशुओं की मृत्यु नहीं होती है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही स्थिति साफ होगी।
