राष्ट्रीय पक्षी दिवस: पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रहा डॉ. जावेद का घर-आंगन
मुरादाबाद, अमृत विचार। पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इनके प्रति जागरुरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 5 जनवरी को राष्ट्रीय पक्षी दिवस मनाया जाता है। एवियन वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा स्थापित राष्ट्रीय पक्षी दिवस, जंगली और कैद में पक्षियों के कल्याण को बढ़ावा देता है। मुरादाबाद जनपद के ब्लॉक कुंदरकी के गांव लालपुर गंगवारी निवासी डॉ. मुहम्मद जावेद पक्षियों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
वह न केवल इंसानों की चिकित्सा के लिए तत्पर रहते हैं बल्कि घायल पक्षियों को भी चिकित्सीय सुविधा दिलाने और उन्हें संरक्षित करने में तल्लीन रहते हैं। उन्होंने कई बार घायल पक्षियों को बचा कर ठीक होने पर जंगल में छोड़ा है। उनके घर का आंगन पक्षियों की चहचहाहट से गूंजता है। वह हर दिन पक्षियों के लिए दाना डालते हैं। जिसे देखकर दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है। उनके घर पर प्रतिदिन पक्षी दाना खाने आते हैं और बिना खतरे के घर के भीतर तक घुस आते हैं। दाना डालने में देरी हो जाए तो मैना कमरे के अंदर तक स्वयं दाना ढूंढ़ने आ जाती हैं। उन्होंने घर के आंगन में पक्षियों के आश्रय के लिए डिब्बे लगाकर घोंसला बनाया है। आंगन में अक्सर दिखाई देते हैं गोरैया, धोबन, नीलकंठ उनके पैतृक घर के आंगन में कबूतर, गौरय्या, मैना, धोबन चिड़िया, नीलकंठ इत्यादि पक्षी अक्सर दिखते हैं।
घुल मिल गये हैं पक्षी
भीषण गर्मी के दौरान डॉ मुहम्मद जावेद पेड़ों पर पानी के बर्तन लटकाते हैं और उनमें नियमित रूप से पानी भरते हैं जिससे पक्षी पानी पी सकें। खेतों पर रहने वाले पक्षी भी उनसे घुल मिल गये हैं और उनसे डरते नहीं हैं। तोते, जल कौये, तटहरी, जल मुर्गी आदि उन्हें पहचानते हैं और देखकर आवाज भी निकालते हैं।
पक्षियों के संरक्षण में जागरुकता महत्वपूर्ण
डॉ जावेद कहते हैं कि पक्षी हमारे पारिस्थितिकीय के लिए अहम हैं। वह मानते हैं कि हमें अपने बच्चों को पक्षियों के विषय में बताया जाना चाहिए और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करना चाहिए। बच्चों को गुलेल से पक्षियों को चोट न पहुंचाने कि सलाह देनी चाहिए, साथ ही पक्षियों को दाना पानी देने की आदतें डालनी चाहिए।
