UP: घर में है गैस गीजर तो रहे सावधान, बिना वेंटीलेशन बाथरूम में चलाना जानलेवा 

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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रामपुर, अमृत विचार। सर्दी के मौसम में बिजली का बिल कम करने के चक्कर में गैस के गीजर इस्तेमाल कर रहे हैं। होशियार रहें गैस का गीजर चलाते समय एहतियात बरतें। क्योंकि बंद बाथरूम में गैस गीजर चलाकर नहाते समय बनने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड जानलेवा हो सकती है। बाथरूम में अगर गैस गीजर लगा रखा है तब बाथरूम में रोशनदान होना जरूरी है। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक बताते हैं कि बाथरूम में रोशनदान नहीं होने से गीजर चलाने पर ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।

कड़ाके की सर्दी में ठंडे पानी से नहाना बड़ी समस्या है इसलिए अधिकांश लोग गरम पानी से नहाते हैं। लकड़ियों के चूल्हे पर पानी गरम करने का जमाना चला गया है अब लोग अपने-अपने बाथरूम में बिजली और गैस के गीजर से पानी गर्म करते हैं। बिजली महंगी होने के कारण लोगों बिजली के गीजर से पानी गर्म करना बंद कर दिया है अब गैस के गीजर का इस्तेमाल ज्यादा किया जा रहा है। लेकिन बाथरूम में लगा गैस गीजर जानलेवा भी साबित हो सकता है। 

ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें लोगों ने जान गंवाई है। इसके लिए बाथरूम में एक रोशनदान का होना जरूरी है। चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. डीके वर्मा बताते हैं कि बाथरूम में गीजर चलाने से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर कम होने का फेफड़ों पर सीधा असर पड़ता है। जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और चारों ओर से बंद बाथरूम में नहाते समय दम घुट जाता है और नहाने वाले की मौत तक हो जाती है।

बरेली और शाहजहांपुर में हो चुकी है गैस गीजर से मौत
गैस गीजर चलाकर नहाने में बरेली और शाहजहांपुर में युवकों की मौत हो चुकी है। जबकि खटकान निवासी शरीफ और मोरी गेट निवासी राम करन गैस का गीजर चलाने के दौरान बेहोश होकर गिर गए थे। इत्तेफाक से घरवालों को गिरने की आवाज आई तब उन्होंने बाथरूम के पास जाकर चिल्लाना शुरू किया शरीफ-शरीफ लेकिन, बाथरूम से कोई आवाज नहीं आने पर परिजन घबरा गए और उन्होंने बाथरूम का दरवाजा तोड़ दिया। शरीफ बाथरूम के फर्श पर बेहोश हुआ पड़ा था। परिजन उसे अस्पताल ले गए जहां उसका उपचार हुआ और ऑक्सीजन दी गई इसके बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल डॉ. बीसी सक्सेना ने बताया कि गैस गीजर से बाथरूम में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है। जिसकी गंध और रंग महसूस नहीं होता है। बाथरूम में कोई रोशनदान नहीं होने से दम घुटने लगता है। सांस के जरिए कार्बन मोनोऑक्साइड फेफड़ों तक पहुंच जाती है जिसके कारण जान चली जाती है। 

 

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