हाईकोर्ट : बांके बिहारी मंदिर दर्शन समय बढ़ाने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका खारिज

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Published By Deepak Mishra
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर, वृंदावन में दर्शन का समय बढ़ाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ की एकलपीठ ने गौरव गोस्वामी द्वारा दाखिल याचिका को खारिज करते हुए दिया।

कोर्ट ने माना कि समिति ने तीर्थयात्रियों की अत्यधिक भीड़ और उन्हें हो रही असुविधा को देखते हुए यह निर्णय लिया था और इसमें हाईकोर्ट के किसी आदेश की अवहेलना नहीं हुई है। दरअसल याचिका में तर्क दिया गया था कि नवंबर 2022 में हाईकोर्ट द्वारा सिविल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद समिति दर्शन का समय नहीं बढ़ा सकती थी।

बता दें कि दर्शन समय बढ़ाने से संबंधित सिविल कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी। कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए पाया कि प्रशासनिक गतिरोध और आंतरिक विवादों के कारण तीर्थयात्रियों को हो रही परेशानियों को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने 8 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त मंदिर प्रबंधन समिति का गठन किया था।

समिति को मंदिर के अंदर और बाहर की दैनिक गतिविधियों की देखरेख का दायित्व सौंपा गया था। इसके तहत 11 सितंबर 2025 को समिति की बैठक में दर्शन अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे लागू करने के लिए 19 सितंबर 2025 को जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर ने कार्यालय ज्ञापन जारी किया।

कोर्ट ने देखा कि 28 नवंबर 2022 का स्थगन आदेश जिस संदर्भ में पारित किया गया था, वह समिति द्वारा बाद में लिए गए निर्णय से भिन्न था। कोर्ट ने कहा कि समिति ने उचित विचार-विमर्श के बाद जनहित और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया था। ऐसे में न तो न्यायालय के आदेश का उल्लंघन हुआ और न ही इसमें अवमानना का कोई मामला बनता है। इसी आधार पर अवमानना याचिका खारिज कर दी गई।

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