सीतापुर में यहां होली के एक दिन बाद मनाया जाता है रंगोत्सव, सदियों पूरानी है यह परंपरा, जानिए क्या है रहस्य

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Edited By Amrit Vichar
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सीतापुर। उत्तर प्रदेश में सीतापुर जिले के पिसावां विकासखंड के ग्राम बिहट गोर और बाबर्डीपुर में होली का रंगोत्सव एक दिन बाद मनाने की अनूठी परंपरा आज भी कायम है। ग्रामीणों के अनुसार इन दोनों गांवों में सदियों से यह परंपरा चली आ रही है। बुजुर्ग बताते हैं कि जमींदारी काल में गांव के लोग 84 कोसी होली परिक्रमा करने के लिए जाते थे। उस समय आवागमन के साधन बहुत कम थे, इसलिए अधिकांश लोगों को पैदल ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

परिक्रमा के अंतिम चरण में श्रद्धालु मिश्रिख में होलिका दहन के दौरान अग्नि तापकर अपने गांव लौटते थे। लंबी पैदल यात्रा के कारण लोग अत्यधिक थक जाते थे, इसलिए अगले दिन विश्राम करते थे और उसके बाद होली का रंगोत्सव मनाया जाता था। ग्राम बिहट गोर के पूर्व प्रधान राजपाल सिंह ने बताया कि उनके बचपन से ही यह परंपरा चली आ रही है। 

उस समय गांव के अधिकांश लोग 84 कोसी परिक्रमा में शामिल होते थे और मिश्रिख में होलिका दहन के बाद गांव लौटते थे। थकान के कारण अगले दिन विश्राम किया जाता था और उसके बाद ही रंग-गुलाल के साथ होली खेली जाती थी। उन्होंने बताया कि आज भी बिहट गोर और बाबर्डीपुर गांव के लोग इस परंपरा का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं और अन्य स्थानों से एक दिन बाद यहां होली का रंगोत्सव मनाया जाता है। यह परंपरा दोनों गांवों की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।

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