वैज्ञानिक फैक्ट : बारिश से पहले क्यों आता है आंधी-तूफान
गर्मी के मौसम में अक्सर देखा जाता है कि तेज धूप और उमस के बाद अचानक मौसम बदलने लगता है। आसमान में काले बादल छा जाते हैं, तेज हवाएं चलने लगती हैं और कई बार आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो जाती है। हाल के दिनों में दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में ऐसा मौसम लगातार देखने को मिला है। सवाल उठता है कि आखिर बारिश से पहले तेज हवाएं, तूफान और आंधी क्यों आती है? इसके पीछे प्रकृति और विज्ञान दोनों का गहरा संबंध है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब पृथ्वी का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है तो जमीन के पास मौजूद हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है और तेजी से ऊपर उठने लगती है। गर्म हवा के ऊपर उठने से नीचे कम दबाव यानी लो प्रेशर का क्षेत्र बन जाता है। इस खाली स्थान को भरने के लिए आसपास की ठंडी और भारी हवा तेजी से उस क्षेत्र की ओर बढ़ती है। यही प्रक्रिया तेज हवाओं को जन्म देती है। जब हवा की गति बहुत अधिक बढ़ जाती है तो यह आंधी या तूफान का रूप ले लेती है।
बारिश से पहले बनने वाले बादलों को क्यूम्यलोनिंबस (Cumulonimbus) बादल कहा जाता है। ये बादल ऊंचाई तक फैलते हैं और इनके भीतर गर्म तथा ठंडी हवाओं का लगातार टकराव होता रहता है। इसी कारण बिजली चमकती है, गरज सुनाई देती है और कई बार ओले भी गिरते हैं। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि तापमान में अचानक बदलाव और वातावरण में नमी बढ़ने से तूफानी परिस्थितियां तेजी से विकसित होती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम के बदलते मिजाज के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय गर्मी दोनों महत्वपूर्ण कारण माने जा रहे हैं। दिन में तेज गर्मी और शाम को नमी मिलने से वातावरण अस्थिर हो जाता है, जिससे धूल भरी आंधी और तेज बारिश देखने को मिलती है। कई बार हवाओं की रफ्तार इतनी बढ़ जाती है कि पेड़ उखड़ जाते हैं, बिजली के खंभे गिर जाते हैं और टीन शेड जैसी हल्की चीजें हवा में उड़ने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भी मौसम का स्वभाव तेजी से बदल रहा है। पहले जहां आंधी-तूफान सीमित क्षेत्रों तक रहते थे, वहीं अब उनकी तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ती दिखाई दे रही हैं। ऐसे मौसम में लोगों को सतर्क रहने, खुले स्थानों से बचने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।
