खबर का असर: बेलरायां CLF घोटाले में बड़े गबन का इशारा ! NRLM डीसी से उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश
स्थानीय जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट डीसी एनआरएलएम को भेजने की तैयारी में
बेलराया में सीएलएफ फर्जीवाड़े की जांच टीम अब अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) डीसी को भेजने की तैयारी में है। लिहाजा बेलरायां क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के मामले में अब बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी पैसे का बंदरबांट की आशंका और भी गहरा गई है।
लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। बेलराया में सीएलएफ फर्जीवाड़े की जांच टीम अब अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) डीसी को भेजने की तैयारी में है। लिहाजा बेलरायां क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के मामले में अब बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी पैसे का बंदरबांट की आशंका और भी गहरा गई है। जांच टीम ने पांच बिंदुओं पर अपनी जांच को आगे बढ़ाया था। जिसमें आरोपों की पुष्टि होने पर पूरे बेलरायां क्लस्टर के सभी ग्राम संगठनों की उच्चस्तरीय जांच कराने की सिफारिश की है।

इन पर लगा धन के बंदरबांट का आरोप
दरअसल बेलरायां क्लस्टर की अध्यक्ष सुनीता देवी, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी श्रीवास्तव और सचिव सुकेता तिवारी पर ग्राम संगठनों को नियम विरुद्ध तरीके से लाखों रुपये ट्रांसफर करने, धोखाधड़ी सहित करोड़ों रुपये बंदरबांट करने का आरोप लगा था। अमृत विचार में छपी खबर को डीसी एनआरएमएल जितेंद्र कुमार मिश्रा ने गंभीरता से लिया था और पूरे प्रकरण की जांच के लिए सहायक विकास अधिकारी ग्राम्य विकास अनुज अवस्थी, फूलबेहड़ के अनुराग पांडेय और निघासन के प्रभारी सहायक विकास अधिकारी राकेश कुमार को नामित कर प्रकरण की जांच सौंपी थी।

डिमांड नहीं फिर भी ग्राम संगठनों को रकम ट्रांसफर
बुधवार को टीम ने विकासखंड निघासन सभागार में पांच बिंदुओं पर जांच की थी, जिसमें पाया गया कि क्लस्टर की पदाधिकारियों ने उन ग्राम संगठनों में लाखों रुपये ट्रांसफर किया, जिन्होंने कोई डिमांड भी नहीं की थी, जिन ग्राम संगठनों ने डिमांड की। उन्हें ढेला भर नहीं दिया गया। कई व्यक्तिगत खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर नकद निकाल लिया गया, जबकि नकद धनराशि व्यक्तिगत खातों में न ही भेजी जा सकती है और न ही नकद धनराशि निकाली जा सकती है।
सभी पांच बिंदुओं पर आरोपों की पुष्टि
टीम को आशंका है कि बेलरायां क्लस्टर में करोड़ों रुपये का वित्तीय गड़बड़झाला किया गया है और सरकारी धनराशि का गबन किया गया है। टीम ने अपनी जांच टीम ने पूरे बेलरायां क्लस्टर की उच्चस्तरीय जांच कराने की सिफारिश भी की है। एडीओ अनुज कुमार अवस्थी ने बताया कि टीम ने पांच बिंदुओं पर जांच की थी। शिकायतों में जो आरोप लगाए गए हैं। उनकी पुष्टि हो रही है। बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और गबन की आशंका के चलते पूरे बेलरायां क्लस्टर की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की सिफारिश की गई है।
नियमों को ताक पर रखकर पदों का खेल
सीएलएफ बेलरायां की अध्यक्ष वर्ष 2014 से लगातार पद पर बनी हुई हैं, जबकि सचिव और कोषाध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारी भी पिछले कई वर्षों से अपने पदों पर काबिज हैं। यह स्थिति तब है जब एनआरएलएम के स्पष्ट नियमों के अनुसार किसी महिला के एक बार किसी समूह, ग्राम संगठन अथवा क्लस्टर स्तर पर पदाधिकारी चुने जाने के बाद उसे दोबारा उसी स्तर पर पदाधिकारी नहीं बनाया जा सकता। जांच में इसकी पुष्टि भी की गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पदाधिकारियों के चयन, कार्यकाल और परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों की निगरानी में होती है, तो फिर नियमों के विपरीत इन महिलाओं को वर्षों तक पदों पर बने रहने की अनुमति कैसे मिलती रही। क्या अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे रखी गईं? यही सवाल अब खड़े हो गए हैं।
ब्लाक मिशन मैनेजर की बहन है आरोपी सचिव
लखीमपुर खीरी। बेलरायां क्लस्टर की ब्लॉक मिशन मैनेजर पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। एनआरएलएम के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ब्लॉक मिशन मैनेजर निघासन के पद पर तैनात शिक्षा शुक्ला बेलरायां क्लस्टर की आरोपी सचिव सुकेता शुक्ला की सगी बहन बताई जाती है। बताते हैं कि शिक्षा शुक्ला का चयन फूलबेहड़ के लिए हुआ था, लेकिन बाद में उन्हें फूलबेहड़ में तैनात न कर अधिकारियों ने बेलरायां क्लस्टर का ब्लॉक मिशन मैनेजर बना दिया। शिक्षा शुक्ला के आने के बाद से ही बेलरायां क्लस्टर में घोलमाल और हेराफेरी शुरू हो गई। इससे अब शिक्षा शुक्ला पर भी सवाल उठने लगे हैं।
