World Environment Day: पीपल, बरगद और नीम हैं प्राकृतिक 'एयर प्यूरिफायर', विशेषज्ञों ने प्लास्टिक को बताया प्रकृति का भस्मासुर

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रो. वेंकटेश दत्ता ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाना तभी सार्थक है जब शहरों में खाली जमीन पर पौधे लगाकर बड़े होने तक उनका संरक्षण किया जाए। लखनऊ शहर में प्रवाहित होने वाली नदियों पर काम कर रहे प्रो. दत्ता ने बताया कि कभी यहां पर छोटी, बड़ी या मौसमी नौ नदियां प्रवाहित थीं, जिन्हें आधुनिकता और विकास ने खत्म कर दिया।

लखनऊ, अमृत विचार: पीपल, बरगद और नीम के वृक्ष प्राकृतिक एयर प्यूरिफायर हैं, ये बात सदियों से हमारे पूर्वज बताते चले जा रहे हैं। अब पर्यावरण विद भी इसे वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित कर रहे हैं। इन पर्यावरण विदों ने प्लास्टिक को प्रकृति का भस्मासुर भी बताया है। बढ़ता प्रदूषण अब जीवन के लिए घातक बनता जा रहा है। नई दिल्ली के सेंटर फॉर साइंस एंवायरमेंट (सीएसई) के अध्ययन में सामने आया है कि हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की बढ़ती संख्या ने मनुष्य के भीतरी अंगों को घायल करना शुरु कर दिया है। शहर ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों से भी रंग बिरंगी तितलियों ने पलायन कर लिया है, जुगनुओं का चमकना बंद हो गया है। रिहाईशी इलाकों में डेरा जमाने वाले पक्षी अब गिनती के दिखाई देते हैं। इसका प्रमुख कारण हमने अपने उपभोग के संसाधनों में अंधाधुंध बढ़ोत्तरी की है, जंगलों को साफ कर दिया, लघु और मौसमी नदियों को विलुप्त कर दिया।

बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रो. वेंकटेश दत्ता ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाना तभी सार्थक है जब शहरों में खाली जमीन पर पौधे लगाकर बड़े होने तक उनका संरक्षण किया जाए। लखनऊ शहर में प्रवाहित होने वाली नदियों पर काम कर रहे प्रो. दत्ता ने बताया कि कभी यहां पर छोटी, बड़ी या मौसमी नौ नदियां प्रवाहित थीं, जिन्हें आधुनिकता और विकास ने खत्म कर दिया। बरगद, पीपल, पाकड़ और नीम आदि विशुद्ध भारतीय वृक्ष न केवल प्राकृतिक एयर प्यूरी फायर हैं, बल्कि तापमान को नियंत्रित भी करते हैं।

प्लास्टिक प्रदूषण बना गंभीर चुनौती

उन्होंने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण सबसे गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों है। हर वर्ष लाखों टन प्लास्टिक कचरा लैंडफिल, नदियों, महासागरों और कृषि भूमि में पहुंच रहा है। बीबीएयू के माइक्रोबायोलॉजी के प्रो. रवि गुप्ता और उनके शोध छात्र दीपक बताते हैं कि प्लास्टिक कचरे के अंश समुद्री जीवों, पेयजल, कृषि मिट्टी और यहां तक कि मानव ऊतकों में पाए जाने लगे हैं। अंबेडकर विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अमित द्विवेदी ने कहाकि स्वच्छ जल, स्वच्छ धरती और शुद्ध वायु के प्राकृतिक संतुलन को हमने ही अंधाधुंध विकास, वनों की कटाई, प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग, ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन तथा ई-वेस्ट के अनियंत्रित प्रसार से नुकसान पहुंचाया है।

World Environment Day

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

-अधिक से अधिक पेड़-पौधे खाली जमीन पर लगाएं
-कूड़ा उत्पादन कम करें और इसे गीला, सूखा में विभाजित करें
-वाहनों की सर्विसिंग समय से कराएं जो धुआं रहित हो
-नदियों, तालाबों और जलस्रोत को प्रदूषण मुक्त रखें
-सिंगल यूज प्लास्टिक या कपड़े या जूट के थैले प्रयोग करें
-वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा को बढ़ावा दें
-एलईडी बल्ब और ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग करें

पर्यावरण बचाने के लिए विशेषज्ञों की 7 अचूक सलाह

  1. अर्बन फॉरेस्ट: खाली जमीनों पर अधिक से अधिक देसी पेड़-पौधे लगाएं और उनका संरक्षण करें।

  2. कचरा प्रबंधन: घरों में कूड़ा कम करें और गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग डस्टबिन में डालें।

  3. स्मार्ट ट्रांसपोर्ट: वाहनों की समय पर सर्विसिंग कराएं ताकि वे धुआं न उगलें।

  4. जल संरक्षण: नदियों, तालाबों और पारंपरिक जलस्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखें और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अपनाएं।

  5. नो प्लास्टिक: सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार कर कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करें।

  6. ग्रीन एनर्जी: सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) के उपयोग को बढ़ावा दें।

  7. बिजली की बचत: घरों में एलईडी बल्ब और ऊर्जा-कुशल (Energy-Efficient) उपकरणों का इस्तेमाल करें।

संबंधित समाचार