हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का बड़ा आदेश, पुलिस कमिश्नर 3 दिन में दें गायब लड़कियों का ब्योरा
- बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पड़ने के बाद पेश की गई चार महीने से गायब किशोरी - डीसीबी दीक्षा शर्मा ने बताया कि उनके अधीन नौ थानों में 15 लड़कियां अभी भी गुमशुदा
लखनऊ, अमृत विचारः 12 वर्षीय नाबालिग किशोरी की गुमशुदगी के मामले में किशोरी के पिता की ओर से दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ लखनऊ ने लखनऊ कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताया है। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त से कमिश्नरेट के सभी थाना क्षेत्रों से गुमशुदा सभी किशोरियों की सुची तलब की है। हालांकि किशोरी के मामले में डीसीपी दीक्षा शर्मा ने व्यक्तिगत हलफनामा देकर कोर्ट को अवगत कराया कि उनके अधीन आने वाले नौ थाना क्षेत्रों से 15 किशोरियां अभी भी गुमशुदा हैं।
न्यायाधीश प्रवीण कुमार गिरि ने आदेश में कहा कि चार महीने से गायब किशोरी के पिता ने जब हाईकोर्ट में रिट की तब कमिश्नरेट के अधिकारी जागे और किशोरी को न्यायालय में पेश किया। इस मामले में उपायुक्त दीक्षा शर्मा ने न्यायालय को दिए गए व्यक्तिगत हलफनामे में बताया कि उनके अधीन नौ पुलिस थानों में 81 लड़कियों (जिनमें अधिकतर नाबालिग है) का या तो अपहरण किया गया था अथवा उन्हें बहला-फुसला कर ले जाया गया था।
इन 81 में 66 लड़कियों को बरामद किया जा चुका है, जबकि 15 अभी भी लापता है। न्यायालय ने इस मामले में जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर ओपी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने न तो इस मामले में उचित जांच की है और ही नाबालिग किशोरी की तलाश का प्रयास किया। न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही किशोरी को बरामद किया जा सका। जो स्वयं उनके द्वारा की गई जांच के तरीके के बारे में बहुत कुछ बताता है।
न्यायालय ने कहा कि इसी तरह के कई मामले होंगे, जिसकी जानकारी पुलिस को नहीं होगी। लखनऊ आयुक्त तीन दिनों के भीतर इस तरह के सभी मामलों की निगरानी करके न्यायालय को रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्हें आगे यह भी निर्देश दिया जाता है कि सभी एसएचओ, चौकी प्रभारी और जांच अधिकारियों को सतर्क किया जाए, क्योंकि मामला नाबालिग लड़कियों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा है।
पुलिस आयुक्त एसे मामलों का भी पता लगाएं, जिसकी सूचना पुलिस को अब तक नहीं दी गई है। पुलिस उपायुक्त को सभी एसएचओ, सीओ और जांच अधिकारियों के साथ 10 जून को न्यायालय में उपस्थित हों। लखनऊ कमिश्नर अगली तारीख को राजधानी के सभी पुलिस थानों में दर्ज इस तरह की घटनाओं के संबंध में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून को सूचीबद्ध किया है।
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