गोंडा में घाघरा नदी की कटान से बचेंगे दर्जनों गांव, 7.34 करोड़ रुपये से बन रहे स्पर और परक्यूपाइन

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Published By Anjali Singh
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एल्गिन-चरसड़ी तटबंध पर सुरक्षात्मक कार्य में जुटे अधिकारी 

गोंडा, अमृत विचार: घाघरा नदी के संभावित उफान और कटान के खतरे को देखते हुए एल्गिन-चरसड़ी तटबंध की सुरक्षा के लिए सिंचाई एवं बाढ़ खंड विभाग सक्रिय हो गया है। तटबंध को मजबूत बनाने के लिए 734.13 लाख रुपये की लागत से दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से काम कराया जा रहा है।

बाढ़ खंड द्वारा बहुवन मदार मांझा के समीप तटबंध के 22.180 किलोमीटर बिंदु पर 496.05 लाख रुपये की लागत से स्पर निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा तीन कतारों में परक्यूपाइन स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे नदी की धारा को नियंत्रित कर कटान रोका जा सके।

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इसके अतिरिक्त 238.13 लाख रुपये की लागत से कच्चे बांध पर खड़ंजा लगाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार तटबंध पर पाए गए रैट होल, स्याही होल और वर्षा से बने रेन कट्स को भरने का कार्य पूरा कर लिया गया है। अधिशाषी अभियंता जय सिंह ने बताया कि परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और मानसून से पहले कार्य पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

हर साल तबाही लेकर आती है बाढ़

घाघरा नदी का नाम सुनते ही एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के आसपास बसे गांवों के लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आती हैं। बाढ़ का मौसम शुरू होते ही ग्रामीणों को अपनी फसलों, घरों और रोजमर्रा की जिंदगी की चिंता सताने लगती है।

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उनका कहना है कि हर वर्ष बाढ़ आती है, राहत कार्य भी होते हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल सका है। बहुवन मदार मांझा, चंदापुर किटौली, नकहरा और आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि बाढ़ आने पर सबसे पहले खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो जाती हैं।

महीनों की मेहनत और पूंजी कुछ ही दिनों में पानी में बह जाती है। कई बार किसानों को कर्ज लेकर अगली फसल की तैयारी करनी पड़ती है। ग्रामीण बताते हैं कि गांवों में पानी भर जाने से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्य भी प्रभावित हो जाते हैं। कई दिनों तक आवागमन बाधित रहता है। बच्चों की पढ़ाई छूट जाती है और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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