बढ़ती गर्मी में एसी यूजर्स सावधान! अचानक तापमान बदलाव से हो सकता है थर्मल शॉक
लखनऊः भीषण गर्मी के इस दौर में एयर कंडीशनर (एसी) लोगों के लिए राहत का सबसे बड़ा साधन बन गया है। घर, कार्यालय, मॉल और वाहनों में घंटों तक ठंडी हवा में रहने के बाद जब अचानक तेज धूप और गर्म वातावरण में निकलना पड़ता है, तो शरीर को असहजता महसूस होने लगती है। कई लोगों को चक्कर आना, सिर भारी लगना, कमजोरी महसूस होना या अचानक बेचैनी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सामान्य असुविधा नहीं, बल्कि शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली पर पड़ने वाला एक तरह का झटका हो सकता है, जिसे आम भाषा में ‘थर्मल शॉक’ या ‘हीट शॉक’ जैसा अनुभव कहा जाता है।
शरीर के तापमान का नियंत्रण
मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहता है। इस तापमान को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी मस्तिष्क के एक छोटे, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्से ‘हाइपोथैलेमस’ पर होती है। यह शरीर का प्राकृतिक थर्मोस्टेट माना जाता है, जो लगातार शरीर और बाहरी वातावरण के तापमान पर नजर रखता है, जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक एसी की ठंडी हवा में रहता है और फिर अचानक बाहर की तेज गर्मी में निकलता है, तो शरीर को तत्काल तापमान परिवर्तन का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हाइपोथैलेमस शरीर को ठंडा रखने के लिए कई प्रक्रियाएं सक्रिय कर देता है।
सबसे पहले त्वचा के पास मौजूद रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘वैसोडाइलेशन’ कहा जाता है। इससे शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर निकलने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पसीना ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं और शरीर पसीने के माध्यम से खुद को ठंडा रखने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया के दौरान हृदय को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धड़कन की गति थोड़ी बढ़ सकती है।
क्यों महसूस होता है झटके जैसा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर को जो अचानक असहजता महसूस होती है, वह तापमान में तेजी से हुए बदलाव के कारण होती है। हमारी त्वचा में विशेष तापमान संवेदक (टेम्परेचर सेंसर) मौजूद होते हैं, जो वातावरण में होने वाले बदलाव की सूचना तुरंत मस्तिष्क तक पहुंचाते हैं, जब व्यक्ति ठंडे कमरे से सीधे तपती धूप में पहुंचता है, तो ये सेंसर एक साथ अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। परिणामस्वरूप मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को बहुत कम समय में शरीर को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालना पड़ता है। इसी वजह से कुछ लोगों को कुछ क्षणों के लिए सिर भारी लगना, चक्कर आना, भ्रम की स्थिति बनना या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो सकती है। हालांकि अधिकांश मामलों में यह स्थिति कुछ समय बाद सामान्य हो जाती है, लेकिन बुजुर्गों, हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों और छोटे बच्चों में इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
डिहाइड्रेशन भी बढ़ा सकता है जोखिम
गर्मी के मौसम में शरीर से पानी की कमी होना एक आम समस्या है। कई लोग यह मान लेते हैं कि एसी में रहने के कारण उन्हें पसीना नहीं आ रहा, इसलिए पानी की आवश्यकता कम है, जबकि वास्तविकता यह है कि एसी वाले वातावरण में भी शरीर धीरे-धीरे नमी खोता रहता है।
यदि कोई व्यक्ति पहले से पर्याप्त पानी नहीं पी रहा है और फिर अचानक गर्म वातावरण में पहुंचता है, तो शरीर तेजी से पसीना निकालना शुरू कर देता है। इससे डिहाइड्रेशन की समस्या और बढ़ सकती है। पानी की कमी के कारण सिरदर्द, थकान, कमजोरी, चक्कर आना, मुंह सूखना और कार्यक्षमता में कमी जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
ऐसे करें बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सावधानी बरतकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है।
- एसी वाले कमरे से निकलते ही सीधे धूप में जाने के बजाय कुछ मिनट छायादार या सामान्य तापमान वाले स्थान पर रुकें।
- पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, भले ही आप एसी में बैठे हों।
- एसी का तापमान अत्यधिक कम रखने से बचें। कमरे और बाहरी वातावरण के तापमान में बहुत अधिक अंतर नहीं होना चाहिए।
- बाहर निकलते समय टोपी, छाता या सूती कपड़ों का उपयोग करें।
यदि चक्कर, अत्यधिक कमजोरी या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो तुरंत आराम करें और पानी पिएं।
संतुलन ही सबसे बड़ा उपाय
एसी गर्मी से राहत देने का एक प्रभावी साधन है, लेकिन इसका उपयोग संतुलित ढंग से करना जरूरी है। शरीर को अत्यधिक ठंडे और अत्यधिक गर्म वातावरण के बीच बार-बार ले जाने से उसकी प्राकृतिक तापमान नियंत्रण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए मौसम की परिस्थितियों के अनुरूप धीरे-धीरे शरीर को अनुकूल होने का समय देना ही स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम है।
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