IVRI बरेली का कमाल: अब फोटो देखकर AI बताएगा गाय की नस्ल, जल्द बनेगा मोबाइल एप
इज्जतनगर, बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने गायों की नस्ल पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है। यह तकनीक तस्वीर के आधार पर गाय की नस्ल की 99 प्रतिशत से अधिक सटीक पहचान करने में सक्षम है। इससे पशुधन प्रबंधन, नस्ल संरक्षण, प्रशिक्षण और फील्ड सर्वेक्षण जैसे कार्यों में मदद मिलेगी।
फोटो से मिलेगी जानकारी
आईवीआरआई के लाइवस्टॉक प्रोडक्ट्स टेक्नोलॉजी डिवीजन के वैज्ञानिक डॉ. अयोन तरफदार ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से प्रशिक्षण, शिक्षण और नस्ल चरित्रीकरण के लिए तैयार किया गया है। इसमें गाय के चेहरे और शरीर की तस्वीरों का विश्लेषण कर नस्ल की पहचान की जाती है। फिलहाल गिर, साहीवाल, थारपारकर, कांकरेज, हरियाना और वृंदावनी नस्लों को मॉडल में शामिल किया गया है।
कई राज्यों का डाटा इस्तेमाल
इस तकनीक को विकसित करने के लिए मथुरा, करनाल, गुजरात समेत कई राज्यों के पशुपालन केंद्रों से जुटाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। इन तस्वीरों के आधार पर मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित किया गया, जिससे यह अलग-अलग नस्लों की पहचान करने में सक्षम हो सका। वैज्ञानिकों का कहना है कि फील्ड में काम करने वाले नए कर्मचारी या पशुपालक कई बार सही नस्ल पहचानने में भ्रमित हो जाते हैं। ऐसे में यह प्लेटफॉर्म फोटो अपलोड करते ही संबंधित नस्ल की जानकारी उपलब्ध करा देगा।
चार महीने में हुआ तैयार
डॉ. अयोन तरफदार ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म महज चार महीने में तैयार किया गया है। इस परियोजना में डॉ. शीतल शर्मा, डॉ. अभिनव दीक्षित, डॉ. हर्ष और शोधार्थी सत्यम ने भी अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल इसे सार्वजनिक सर्वर पर शुरू नहीं किया गया है, लेकिन भविष्य में इसे मोबाइल एप के रूप में भी विकसित किया जाएगा।
किसानों के लिए होगा मुफ्त
सहयोगी वैज्ञानिक डॉ. शीतल शर्मा के अनुसार, प्लेटफॉर्म का कॉपीराइट लिया जाएगा, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी के लिए मुफ्त रहेगा। इंडीजीनियस कैटल ब्रीड आइडेंटिफिकेशन प्लेटफॉर्म पर गाय के चेहरे या सामने से शरीर की तस्वीर अपलोड करते ही उसकी नस्ल की जानकारी मिल जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि किन विशेषताओं के आधार पर उस नस्ल की पहचान की गई है। भविष्य में इसमें अन्य भारतीय पशु नस्लों को भी शामिल किया जाएगा।
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