Bihar के IAS संजीव हंस समेत 8 पर चार्जशीट, 3.5% कमीशन के खेल से खुला करोड़ों के भ्रष्टाचार का नेटवर्क
अमृत विचार : बिहार की राजधानी पटना में एसवीयू की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। यहां रिशु श्री केस में जांच एजेंसी ने दो बड़े IAS अधिकारियों समेत 3 लोगों के ठिकाने पर रेड की है। इस चर्चित घोटाले में जिन लोगों के नाम सामने आये है, उनमे IAS योगेश कुमार सागर, IAS अभिलाषा शर्मा और रिशु श्री के खास लोगों में पवन कुमार के नाम शमिल है, वही छापेमारी के दौरान इन जगहों पर ये सभी गायब मिले। सभी के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए गए है मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है।
क्या है रिशु श्री प्रकरण और कैसे होता था खेल?
जांच एजेंसियों के दावों के मुताबिक, ऊचें पदों पर बैठे अधिकारियों ने अपने पद का दुरूपयोग कर करोड़ों की ठगी का खेल रचाया है। आरोप है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने अपने पद और पावर का न सिर्फ दुरुपयोग किया, बल्कि रिशु श्री की कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों तक को बदल डाला।
शेल कंपनियों के जरिए डकारे करोड़ों रुपये
बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) की चार्जशीट दाखिल होने के बाद भ्रष्टाचार के उस 'सिंडिकेट' का पर्दाफाश हो गया है, जिसने पूरे सरकारी सिस्टम को अपनी जेब में रख लिया था। जांच एजेंसियों की ओर से अदालत में पेश किए गए दस्तावेज बताते हैं कि यह पूरा मामला महज प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि 'अधिकारी-ठेकेदार नेक्सस' (गठबंधन) का एक ऐसा खतरनाक कॉकटेल है, जिसने नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाकर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई।
3.5% की 'फिक्स डील'
एसवीयू (SVU) की चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा कमीशनखोरी के फिक्स पैटर्न को लेकर हुआ है। जांच में दावा किया गया है कि रसूखदार ठेकेदार रिशु श्री और अधिकारियों के बीच 3.5 प्रतिशत तक का फिक्स कमीशन नेटवर्क काम कर रहा था। यानी, जनता के विकास के लिए आने वाले हर 100 रुपये के फंड में से साढ़े तीन रुपये सीधे इस सिंडिकेट की जेब में जा रहे थे। इस 'कट मनी' के बदले नियम-कानूनों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर रिशु श्री की कंपनियों को सौंप दिए जाते थे।
8 लोगों को बनाया गया आरोपी
SVU एडीजी पंकज कुमार दराद ने एक प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी देते हुए कहा, विस्तृत जांच के बाद करीब चार हजार पृष्ठों का आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण में दाखिल आरोप पत्र में आईएएस अधिकारी संजीव हंस, ठेकेदार रिशु श्री और मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास, और उमेश कुमार सिंह, संतोष कुमार, पावन कुमार के नाम शामिल है। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी के खिलाफ गहन जांच और आरोपियों की भूमिका और जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को पूरी तरह परीक्षण कर आरोप पत्र तैयार किया गया है।
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