राम मंदिर दान विवाद के बीच BJP का पलटवार, पंकज चौधरी ने अखिलेश से पूछा- श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर चुप्पी क्यों?
लखनऊ। अयोध्या राम मंदिर दान विवाद को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुद्दे पर अखिलेश यादव की चुप्पी को लेकर सवाल उठाते हुए इसे वोट बैंक की राजनीति से जोड़ा।
सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर किए गए पोस्ट में पंकज चौधरी ने लिखा, "अयोध्या को लेकर आवाज उठाना और मथुरा पर घनघोर चुप्पी। जहां वोट बैंक दिखे, वहां आवाज और जहां सच बोलना पड़े, वहां खामोशी-यही सपा अध्यक्ष की राजनीति का सबसे बड़ा सिद्धांत है।"
उन्होंने आगे सवाल किया कि "मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे पर चुप्पी क्यों? क्या यह मौन सिद्धांतों का है या फिर वोट बैंक की मजबूरी का?" चौधरी ने दावा किया कि अखिलेश यादव की "सेलेक्टिव पीड़ा" तुष्टिकरण की राजनीति का असली चेहरा उजागर करती है।
राम मंदिर दान विवाद से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद
गौरतलब है कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 7 जून को अयोध्या राम मंदिर में दान राशि के कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।
शनिवार को अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो अयोध्या को दुनिया की सबसे पवित्र और बेमिसाल धार्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा।
योगी आदित्यनाथ ने भी साधा था निशाना
इससे पहले रविवार को हाथरस में आयोजित एक जनसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि "अयोध्या को तो राम भक्तों ने संवार दिया है। अगर वास्तव में धार्मिक हैं तो मथुरा-वृंदावन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर खुलकर बोलिए। यह भी कहिए कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान चलना चाहिए।"
क्या है श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद?
मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर अदालत में कई याचिकाएं लंबित हैं। हिंदू पक्ष ने मस्जिद का ढांचा हटाने, विवादित भूमि का कब्जा सौंपने और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग करते हुए 18 वाद दायर किए हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को ध्वस्त कर वहां शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया गया था। वहीं, इस मामले की सुनवाई न्यायालय में जारी है।
