68500 शिक्षक भर्ती: OBC अभ्यर्थियों को 5% छूट न देना समानता के अधिकार का उल्लंघन, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट
लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा-2018 के संबंध में महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अभ्यर्थियों को उत्तीर्णांक में 5 प्रतिशत की छूट का लाभ न देना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
आयोग ने शासन के पक्ष को अस्वीकार करते हुए 5 जनवरी 2022 को दी गई अपनी पूर्व संस्तुति को यथावत बरकरार रखा है। आयोग ने अपनी संस्तुति गुरवार को शासन को भेज दिया है।
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भर्ती परीक्षा-2018 में प्रारंभिक रूप से सामान्य और OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 150 में 67 अंक (45 प्रतिशत) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए 60 अंक (40 प्रतिशत) उत्तीर्णांक निर्धारित किए गए थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शासन द्वारा प्रस्तुत वाद पत्र और न्यायालय के जिन निर्णयों का उल्लेख किया गया, उनमें ऐसा कोई तथ्य नहीं पाया गया जिससे OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत छूट देने पर कोई कानूनी रोक सिद्ध होती हो।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया को सात वर्ष बीत जाने का तर्क न्यायसंगत नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार विलंब का कारण बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोग की 5 जनवरी 2022 की संस्तुति पर समय से कार्रवाई न करना रहा। ऐसे में देरी का आधार बनाकर अभ्यर्थियों को न्याय से वंचित रखना असंवैधानिक और दंडात्मक प्रकृति का है।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि स्वयं उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव ने स्वीकार किया है कि सहायक अध्यापक भर्ती-2019 तथा जूनियर (एडेड) सहायक अध्यापक/प्रधानाध्यापक भर्ती-2021 में OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट दी गई थी। ऐसे में केवल 68,500 शिक्षक भर्ती-2018 के अभ्यर्थियों को इस लाभ से वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का उल्लंघन है।
इन तथ्यों के आधार पर आयोग की 16 जून 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 68,500 शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में OBC अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत की छूट देते हुए 150 में 60 अंक (40 प्रतिशत) पर उत्तीर्ण माना जाए तथा तदनुसार परीक्षा परिणाम संशोधित कर सफल अभ्यर्थियों की सूची शीघ्र आयोग को उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही आयोग ने यह भी संस्तुति की है कि 5 जनवरी 2022 की संस्तुति और उसके अनुस्मारक पर न्यायोचित कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध आरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इस प्रकरण की पैरवी कर रहे अभ्यर्थी तूफ़ान सिंह ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग ने लगातार दूसरी बार OBC अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों को स्वीकार किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि आयोग की संस्तुतियों का तत्काल अनुपालन करते हुए संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए तथा पात्र अभ्यर्थियों को शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
