Gonda News: जहां श्रीराम ने बाण से सरयू की धारा पहुंचाई थी, उस पावन रामघाट के विकास को मिली लाखों की सौगात
रामायण सर्किट के तहत गोंडा स्थित त्रेतायुगीन श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम रामघाट का होगा कायाकल्प, आधुनिक सुविधाओं के साथ संवरेंगे आस्था और पर्यटन के केंद्र।
गोंडा। रामायण काल से जुड़ी आस्था और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। रामायण सर्किट के अंतर्गत जनपद गोंडा के त्रेतायुगीन पौराणिक तीर्थ श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम, रामघाट के पुनर्विकास की योजना को मंजूरी दी गई है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस परियोजना के लिए 66.86 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने अपने बाण का संधान कर दक्षिण दिशा की ओर छोड़ा था, जिससे सरयू नदी की एक धारा आश्रम तक पहुंची और बाद में पुनः सरयू में मिल गई। यही कारण है कि यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
आधुनिक सुविधाओं से सजेगा पौराणिक तीर्थ
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि तरबगंज तहसील स्थित श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें—
- अत्याधुनिक बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण
- विश्राम, ध्यान और योग के लिए विशेष व्यवस्था
- सुगम भ्रमण पथ (वॉकवे) का निर्माण
- आकर्षक सजावटी प्रकाश व्यवस्था
- त्रेतायुगीन इतिहास को दर्शाने वाली थीम आधारित बेंच की स्थापना
इस पूरे विकास कार्य का दायित्व उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपा गया है।
श्रीराम और अष्टावक्र ऋषि से जुड़ी है रामघाट की मान्यता
गोंडा जिले की अमदही ग्राम पंचायत में स्थित श्री अष्टावक्र ऋषि आश्रम का उल्लेख रामायण काल से जुड़ी जनश्रुतियों में मिलता है।
मान्यता है कि वनवास से लौटने के बाद भगवान श्रीराम ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया और अष्टावक्र ऋषि को आमंत्रित किया। ऋषि ने छह माह तक चलने वाले अपने अनुष्ठान का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई।
इसके बाद श्रीराम स्वयं रामघाट पहुंचे। जब उन्हें पता चला कि आश्रम तक सरयू का जल लाने के लिए तीन कोस दूर जाना पड़ता है, तो उन्होंने अपने बाण से सरयू की धारा आश्रम तक पहुंचा दी। यही धारा आगे चलकर 'बरसोत' के नाम से प्रसिद्ध हुई। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने इसी स्थान पर स्नान किया, ऋषि का यज्ञ संपन्न कराया और उन्हें अपने साथ अयोध्या ले गए। तभी से यह स्थल रामघाट के नाम से विख्यात है।
रामायण सर्किट को मिलेगा नया धार्मिक केंद्र
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार रामायण सर्किट का विस्तार कर रही है। इसी क्रम में अब अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोंडा स्थित यह प्राचीन आश्रम भी एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अयोध्या से लगभग एक घंटे की दूरी पर स्थित यह तीर्थ प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक अनुभव का अनूठा संगम है। वहीं लखनऊ से करीब 120 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से ढाई से तीन घंटे में तय की जा सकती है। रेल यात्रियों के लिए गोंडा जंक्शन सबसे निकट का प्रमुख रेलवे स्टेशन है।
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