Kanpur News: जल जीवन मिशन ने बदली ग्रामीण यूपी की तस्वीर, IIT कानपुर की स्टडी में आकड़ें आये सामने
आईआईटी कानपुर के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के देवीपाटन क्षेत्र के गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों को शामिल किया गया है। अध्ययन के तहत 80 गांवों के लगभग 4 हजार परिवारों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें प्रत्येक जिले के 20 गांव शामिल थे।
कानपुर, अमृत विचार। आईआईटी कानपुर की ओर से हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल उपलब्ध होने से उत्तर प्रदेश के देवीपाटन क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे पानी लाने में लगने वाला समय और मेहनत कम हुई है। जिससे परिवारों को घरेलू कार्यों, बच्चों की पढ़ाई, देखभाल और अन्य उपयोगी गतिविधियों के लिए अधिक समय मिल रहा है।
आईआईटी कानपुर के मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के देवीपाटन क्षेत्र के गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों को शामिल किया गया है। अध्ययन के तहत 80 गांवों के लगभग 4 हजार परिवारों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें प्रत्येक जिले के 20 गांव शामिल थे। अध्ययन मंं आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन चारों जिलों में 97.11 प्रतिशत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है।
वर्तमान में 4,672 गांवों के 15.18 लाख ग्रामीण परिवारों को कार्यशील नल कनेक्शन उपलब्ध हैं। अध्ययन में शामिल अधिकांश परिवारों ने बताया कि घर पर नल से पानी मिलने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। देवीपाटन क्षेत्र में कुल 75.8 प्रतिशत परिवारों ने जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार की बात कही। यह आंकड़ा गोंडा में 77.7 प्रतिशत, बहराइच में 79.6 प्रतिशत, श्रावस्ती में 66.8 प्रतिशत और बलरामपुर में 78.7 प्रतिशत रहा।
महिलाओं को मिली सुरक्षा
पानी की आसान उपलब्धता का महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और कार्यभार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुल 70.2 प्रतिशत परिवारों ने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा में उल्लेखनीय सुधार होने की बात कही। यह आंकड़ा गोंडा में 75 प्रतिशत, बहराइच में 72.9 प्रतिशत, श्रावस्ती में 62.1 प्रतिशत और बलरामपुर में 70.8 प्रतिशत रहा। महिलाओं के कार्यभार में कमी गोंडा के 73.5 प्रतिशत, बहराइच के 79.2 प्रतिशत, श्रावस्ती के 68 प्रतिशत और बलरामपुर के 76.8 प्रतिशत परिवारों ने महसूस की।
बच रहा समय
घर पर नल से पानी मिलने के कारण बचा हुआ समय अब परिवार के विभिन्न उपयोगी कार्यों में लगा है। सर्वेक्षण के अनुसार, 63.6 प्रतिशत परिवार इस अतिरिक्त समय का उपयोग घरेलू कामों में कर रहे हैं, 45.8 प्रतिशत परिवार आराम और मनोरंजन के लिए तथा 34.2 प्रतिशत परिवार बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में इसका उपयोग कर रहे हैं। 10.2 प्रतिशत परिवार इस समय का उपयोग आय बढ़ाने वाले कार्यों में कर रहे हैं, जबकि 0.7 प्रतिशत परिवार स्वयं की शिक्षा या कौशल विकास के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं।
पीने का पानी मिला
घरेलू नल कनेक्शन अब पीने के पानी का भी प्रमुख स्रोत बन चुके हैं। बलरामपुर के 90.9 प्रतिशत, गोंडा के 83.5 प्रतिशत, बहराइच के 83.2 प्रतिशत और श्रावस्ती के 72.5 प्रतिशत परिवार पीने के लिए नल के पानी का उपयोग कर रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 99.1 प्रतिशत परिवारों में पिछले छह महीनों के दौरान जलजनित बीमारियों का कोई मामला सामने नहीं आया।
बेहतर हुई व्यवस्था
विश्वसनीय जल उपलब्धता से स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता एवं साफ-सफाई की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव बालिकाओं की शिक्षा पर भी देखने को मिला है। अध्ययन के अनुसार, गोंडा में बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति में 38.1 प्रतिशत, बहराइच में 17.4 प्रतिशत, श्रावस्ती में 15.1 प्रतिशत और बलरामपुर में 13.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
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