Raebareli News : ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत में 6.88 लाख की वित्तीय अनियमितता का खुलासा! प्रधान-सचिव दोषी, प्रशासक पर गिरी गाज

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104 कार्यों की पत्रावलियां नहीं मिलीं, इंटरलॉकिंग-खड़ंजा समेत कई विकास कार्यों में गड़बड़ी;

रायबरेली, अमृत विचार। ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत में करीब 6.88 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला अंतिम जांच में सामने आया है। जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं प्रशासक धनराज यादव तथा ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी रुद्र प्रताप सिंह को वित्तीय अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाया गया है।

मामले में जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका ने निवर्तमान प्रधान धनराज यादव को प्रशासक पद से हटाते हुए सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), ऊंचाहार को नया प्रशासक नियुक्त किया है। जिलाधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की याचिका समिति के निर्देश पर ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात से संबंधित शिकायत/याचिका संख्या 1011/2019 की विस्तृत जांच कराई गई।

संयुक्त आयुक्त, मनरेगा, ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश द्वारा 7 फरवरी 2025 को गठित जांच समिति तथा उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के 6 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में गठित अंतिम जांच समिति ने अभिलेखों, स्थलीय निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के आधार पर जांच की।

जांच के दौरान ग्राम पंचायत की ओर से करीब 104 कार्यों से संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके चलते इन कार्यों की जांच नहीं हो सकी। उपलब्ध अभिलेखों और स्थलीय सत्यापन में कई इंटरलॉकिंग एवं खड़ंजा निर्माण कार्यों में माप पुस्तिका और मौके पर मिले निर्माण में अंतर पाया गया। छह निर्माण कार्यों में कुल 1,99,532.24 रुपये का अधिक भुगतान अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आई।

इसके अलावा ह्यूम पाइप स्थापना, इंडिया मार्का हैंडपंपों के रीबोर व प्लेटफार्म निर्माण तथा स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत से जुड़े कार्यों में भी अनियमितताएं मिलीं। इन कार्यों में 4,88,679.16 रुपये के अधिक भुगतान अथवा धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इस तरह अंतिम जांच में कुल 6,88,211.40 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई।
आधी-आधी धनराशि होगी वसूल

अंतिम जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान/प्रशासक धनराज यादव और ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम विकास अधिकारी रुद्र प्रताप सिंह को जिम्मेदार ठहराया गया है। ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन उनके स्पष्टीकरण में आरोपों के निराकरण के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 27(2) के प्रावधानों के तहत कुल वित्तीय अनियमितता की धनराशि की आधी-आधी वसूली के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत 3,44,105 रुपये सचिव तथा 3,44,105 रुपये निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक से वसूल किए जाएंगे। धनराशि ग्राम निधि में जमा कर उसकी रसीद जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी।

जांच में राज्य वित्त आयोग और 15वें वित्त आयोग से संबंधित कार्यों के अभिलेख समय से उपलब्ध न कराने की बात भी सामने आई। संबंधित सचिव के विरुद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कराए जाने के साथ वित्तीय अनियमितता की धनराशि की वसूली के लिए भी कार्रवाई की गई है।

दोषी प्रधान नहीं संभाल सकता प्रशासक की जिम्मेदारी

नियमों के अनुसार अंतिम जांच में वित्तीय एवं अन्य अनियमितताओं के लिए दोषी पाए गए प्रधान को वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के बाद धनराज यादव को ऊंचाहार देहात ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया गया था। अंतिम जांच में उन्हें वित्तीय अनियमितताओं के लिए दोषी पाए जाने और उनके विरुद्ध कार्रवाई लंबित होने के कारण शासन के प्रावधानों के तहत प्रशासक पद से हटा दिया गया है। अब सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), ऊंचाहार ग्राम पंचायत ऊंचाहार देहात के प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे।

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