पटना देवकली : जहां शुक्राचार्य ने की थी 8 शिवलिंग की स्थापना
बात जरा चौकाने वाली है, लेकिन किंवदंतियों में सच है। शाहजहांपुर की कलान तहसील क्षेत्र के गांव पटना देवकली में दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने 8 हजार साल तक भगवान शिव के लिए तपस्या की थी। दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने कलान के पटना देवकली में आठ शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां पूजा के लिए लंकापति रावण भी आया था। हजारों साल पुराने पटना देवकली मंदिर में स्थापित आठ शिवलिंग की पूजा के लिए यूपी ही नहीं, दूसरे प्रदेशों से भी श्रद्धालुगण कांवड़ लेकर आते हैं। इस मंदिर में मानी गईं मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु हैंडंपप लगवाते हैं। यह मंदिर करीब बीस सालों तक डकैतों की शरणस्थली भी रहा। पुलिस भी यहां आने से कतराती थी।

सावन और महाशिवरात्रि पर पटना देवकली मंदिर पर मेला लगता है। इस प्राचीन शिवमंदिर पर भी आस्था का सैलाब देखने को मिलता है। किवदंती है कि यहां आकर गुरु वृहस्पति के पुत्र कक्ष ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या भी सीखी थी। शाहजहांपुर जिले की कलान तहसील के गांव पटना देवकली में प्राचीन शिवमंदिर की महत्ता दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है। मंदिर के महंत ने बताया कि दैत्यगुरु शुक्राचार्य की तपोभूमि पटना देवकली शिव मंदिर पर साल भर में दो बार मेला लगता है। फाल्गुन माह के महाशिवरात्रि पर तथा सावन में पूरे माह मेला लगता है।
मेले में लाखों की संख्या में दूर-दूर से भक्त आते हैं। महंत ने बताया कि गुरु शुक्राचार्य ने अपने हाथों से आठ अंश के शिवलिंग की स्थापना की थी। कानपुर-मुरादाबाद हाईवे से लगे हुए ऊंचे टीले पर स्थिति इस मंदिर में शुक्राचार्य ने आठ हजार वर्ष तक तपस्या की थी। शिव के उपासक लंकापति रावण ने यहां आकर कई बार पूजा-अर्चना की है। गुरु वृहस्पति के पुत्र कक्ष ने इसी शिव मंदिर पर आकर गुरु शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या सीखी थी। प्राचीन शिव मंदिर होने के कारण यहां लाखों की संख्या में भक्त आकर अपनी मनौती मांगते हैं।
वर्ष भर में दो बार लगने वाले विशाल मेले में डहरपुर, बदायूं, बरेली, मुरादाबाद, एटा, फर्रूखाबाद, दिल्ली, पंजाब आदि स्थानों से शिव भक्त आते हैं। मंदिर की फील्ड में सैंकड़ों की संख्या में भक्तों ने मनौती पूर्ण होने पर हैंडपंप लगवाए हैं। मनौती पूरी होने पर यहां बड़े-बड़े घंटे भी श्रद्धालु टंगवाते हैं। शाहजहांपुर के कल्लू-नज्जू, रानी ठाकुर, लाल जैसे डकैतों के टंगवाए गए घंटे भी यहां आज भी लटक रहे हैं। पूर्व में दिल्ली के उद्योगपति विमल कुमार शर्मा ने मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे। साथ ही एक भक्तों के ठहरने के लिए दो मंजिला धर्मशाला का निर्माण कराया है।
भर गई सब की झोलियां कोई खाली न गया
पटना देवकली मंदिर आने श्रद्धालु अपनी मनौतियां भोलेनाथ से मांगते हैं। मनौतियां पूरी होने पर हैंडपंप लगवाने की बात कहते। फिर हैंडपंप मेला परिसर में लगवाते हैं। पटना देवकली में हजारों की संख्या में नल लगे हुए हैं। मंदिर के पड़ोस में एक प्राचीन झील थी, लेकिन उस झील पर लोगों की नजर लग गई है, जिस पर कब्जा कर है, जिससे झील पर अस्तित्व खो रही है।
