जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृन्दावन में तैयारी तेज, आधी रात मनाया जायेगा श्री कृष्ण का जन्मोत्सव; जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

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Edited By Anjali Singh
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जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां तेज हो गई हैं। आधी रात श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जानें जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और खास तैयारियां

मथुरा। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित भागवत भवन सहित सभी मंदिरों में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी चार सितंबर को मध्यरात्रि में मनाया जाएगा। इस वर्ष महापर्व का आयोजन 'गौरक्षा-राष्ट्र रक्षा' के संकल्प सूत्र के साथ किया जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा तथा सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि जन्मोत्सव के अवसर पर महाभिषेक के बाद ठाकुरजी भागवत भवन स्थित राधाकृष्ण मंदिर में कलहंस पुष्प बंगले में 'पंचरत्नी' पोशाक धारण कर विराजेंगे। 

उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को भव्य बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा, ''श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विशाल मंदिर परिसर को और अधिक मनोहारी एवं चित्ताकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। मंदिर के बाहरी हिस्से में आकर्षक सजावट और रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। प्रकाश शिखर और पूरा परिसर भी भव्य रूप में दिखाई देगा।'' 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि ठाकुरजी रत्न-जड़ित मुकुट, बांसुरी, नवरत्न-जड़ित कंठा सहित विभिन्न शृंगार सामग्री धारण करेंगे। भगवती योगमायाजी विशिष्ट दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में विराजमान ठाकुर केशवदेव, मां योगमाया, गर्भगृह और ठाकुर राधाकृष्ण युगल सरकार मंदिर में विशिष्ट पूजन, सहस्रार्चन, जन्माभिषेक और आरती के दिव्य दर्शन होंगे। मंदिर की साज-सज्जा और व्यवस्थाएं इस बार नयनाभिराम एवं अभूतपूर्व होंगी। 

शर्मा ने कहा, ''ठाकुरजी 'पंचरत्नी' पोशाक धारण करेंगे जिस पर पंचरत्नों के रूप में कामधेनु गाय, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, समुद्र मंथन से प्राप्त ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष को विशेष रूप से उकेरा गया है। जरी, रेशम और रत्नों की प्रतिकृतियों का प्रयोग कर तैयार की गई इस पोशाक के दर्शन भक्तों को अभिभूत करेंगे।'' जन्माष्टमी के अवसर पर ठाकुरजी को धारण कराई जाने वाली यह पोशाक तीन सितंबर को शाम साढ़े पांच बजे भव्य एवं दिव्य शोभायात्रा के साथ जन्मस्थान परिसर में प्रवेश करेगी। 

काशी, अयोध्या के प्रसाद और उपहार से सजेगा श्री कृष्णा का धाम 

इस अवसर पर पोशाक के साथ काशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त प्रसाद और सुगंधित द्रव्य आदि तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम से प्राप्त उपहार एवं अभिषेक सामग्री भी प्रदर्शित की जाएगी।उन्होंने कहा, ''अयोध्या, मथुरा और काशी जैसी तीनों पवित्र पुरियों के इस अद्भुत समन्वय से अलौकिक दृश्य त्रिवेणी संगम जैसा भाव प्रस्तुत करेगा। करोड़ों सनातनियों के आस्था केंद्र और कंस के कारागार के रूप में भक्तों के हृदय में विराजमान गर्भगृह को भी विशेष रूप से सजाया जा रहा है।'' 

200 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल

शर्मा ने कहा, ''करीब 200 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल कर गर्भगृह के चबूतरे और दीवारों को सुंदर स्वरूप दिया गया है। इस वर्ष नवनिर्मित रजत-कमल में विराजमान श्रीगोपालजी का जन्माभिषेक भक्तों को निश्चित रूप से अभिभूत करेगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान समिति के सदस्यों ने कहा, ''भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, शिव और अनेक देवताओं के प्राकट्य की साक्षी रही भारत की पवित्र भूमि पर सनातन की आत्मा मानी जाने वाली गौमाता पर हो रहे अत्याचार से प्रत्येक सनातनी और कृष्णभक्त व्यथित है।'' 

गौमाता की रक्षा का संकल्प 

उन्होंने कहा, ''गौमाता की रक्षा और सम्मान के लिए गोपाल की जन्मभूमि, लीलाभूमि और ब्रजभूमि से करोड़ों कृष्णभक्तों को उसकी रक्षा का संकल्प दिलाया जाएगा।'' भगवान के जन्मोत्सव की शुरुआत चार सितंबर को सुबह साढ़े पांच बजे शहनाई की सुमधुर धुन और नगाड़ों के वादन के साथ मंगला आरती से होगा। इसके बाद सुबह आठ बजे भगवान का दिव्य पंचामृत अभिषेक पवित्र स्तोत्रों के पाठ और पुष्पार्चन के साथ संपन्न होगा। 

1008 कमल-पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्रार्चन

मंगलाचरण और वेदमंत्रों के सस्वर उच्चारण के बीच भगवान का पुष्पार्चन किया जाएगा। इस अवसर पर ब्रज के उत्कृष्ट गायक ठाकुरजी के समक्ष दिव्य भजन-गायन की प्रस्तुति देंगे। जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात दस बजे श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से शुरू होगा। इसके बाद 1008 कमल-पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्रार्चन करते हुए उनका आह्वान किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान समिति ने सदस्यों ने कहा कि मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ पूरा मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और मृदंग की ध्वनि से गूंज उठेगा। 

श्री कृष्ण की महाआरती 

इसी समय भगवान के जन्म की महाआरती शुरू होगी, जो रात 12:10 बजे तक चलेगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद केसर आदि सुगंधित द्रव्यों से अभिषिक्त भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह 'रजत सूप' में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। इसके बाद कामधेनु स्वरूपा स्वर्णमंडित रजत गो अपने पयोधर से भगवान के श्रीविग्रह का प्रथम अभिषेक करेंगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद ठाकुरजी का श्रीविग्रह अभिषेक स्थल पर रजत कमल में विराजमान होगा। 

आधी रात होगा भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

जन्माभिषेक के बाद रात 12 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक ठाकुरजी की शृंगार आरती होगी। जन्माष्टमी के दिन सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्व की भांति उत्तरी द्वार (गोविंद नगर की ओर) से होगा, जबकि निकासी पूर्व दिशा में स्थित दक्षिणी द्वार (मुख्य द्वार) से होगी। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित लीलामंच पर शाम सात बजे से रात नौ बजे तक एक सितंबर से पांच सितंबर तक विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जाएगा। इनमें 'माखन चोर गोपाल लीला', 'मीरा बाई चरित्र लीला', 'श्यामा-श्याम मिलन लीला', 'श्रीकृष्ण जन्म लीला' तथा 'गिरिराज पूजा व छप्पनभोग दर्शन' प्रमुख हैं।

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