Lakhimpur Kheri : बारिश में क्यों बढ़ जाता स्क्रब टाइफस का खतरा, लखीमपुर में अलर्ट स्वास्थ्य विभाग

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Edited By Ateeq Khan
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खेत-झाड़ियों और घास वाले इलाकों में जाने वालों को सावधानी बरतने की सलाह

स्क्रब टाइफस की सबसे बड़ी चुनौती इसकी शुरुआती पहचान है। इसके कई लक्षण डेंगू और वायरल फीवर से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण मरीज और परिजन इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार नहीं होने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

अमृत विचार : लखीमपुर खीरी में बारिश के मौसम में खेतों, झाड़ियों और घास वाले इलाकों में बढ़ी नमी के बीच स्क्रब टाइफस का खतरा फिर बढ़ गया है। राहत की बात यह है कि जिले में इस साल अब तक स्क्रब टाइफस का एक भी मरीज नहीं मिला है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इसलिए भी क्योंकि पिछले वर्षों में जिले में इस बीमारी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी हरिशंकर के मुताबिक स्क्रब टाइफस संक्रमित माइट्स के काटने से होने वाला संक्रामक रोग है। बारिश के बाद खेतों, झाड़ियों और घास वाले स्थानों में नमी बढ़ने से ऐसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बीमारी की शुरुआत सामान्य बुखार से होती है। फिर तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, अत्यधिक थकान और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाना-इसके प्रमुख लक्षण बताए जाते हैं।

डेंगू-वायरल से मिलते हैं लक्षण

स्क्रब टाइफस की सबसे बड़ी चुनौती इसकी शुरुआती पहचान है। इसके कई लक्षण डेंगू और वायरल फीवर से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण मरीज और परिजन इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार नहीं होने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे में लगातार बुखार रहने या बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच कराने की सलाह दी गई है।

पिछले वर्षों में बढ़े थे मामले

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में स्क्रब टाइफस के मामलों में वर्ष 2021 के बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वर्ष 2021 में सात, 2022 में 12, 2023 में 22, 2024 में 13 और 2025 में 14 मरीज सामने आए थे। वर्ष 2026 में अब तक कोई मरीज सामने नहीं आया है। हालांकि बारिश का मौसम अभी जारी होने के कारण स्वास्थ्य विभाग किसी तरह की लापरवाही के पक्ष में नहीं है।

बचाव के लिए शरीर को ढककर रखें

स्वास्थ्य विभाग ने खेतों और झाड़ियों में काम करने वाले लोगों को पूरी बांह के कपड़े पहनने तथा शरीर के अधिकतर हिस्से को ढककर रखने की सलाह दी है। घास और झाड़ियों वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने और बुखार समेत अन्य लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया गया है।

 

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