Good News : पोषण की नई ताकत बना यूपी का टेक होम राशन

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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बच्चों में नाटेपन की दर 46.3% से घटकर 31.5% पर पहुंची, 4 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार

लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रहा अभियान अब बच्चों और महिलाओं के पोषण के साथ ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता का भी माध्यम बन रहा है। टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के तहत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की अलग-अलग जरूरतों के अनुरूप सात तरह के पोषण उत्पाद तैयार कर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें शिशु अमृत, शिशु आहार, बाल पुष्टिकर, संपूर्ण मातृ आहार, आरोग्य पोषण, बाल संजीवनी और सक्षम पोषण शामिल हैं। इन उत्पादों में ऊर्जा, प्रोटीन, आयरन सहित जरूरी पोषक तत्वों को शामिल किया गया है।

योजना के प्रभाव से बच्चों में नाटेपन की दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में यह दर 46.3 प्रतिशत थी, जो 2019-21 में घटकर 39.7 प्रतिशत और अब 31.5 प्रतिशत रह गई है। अल्पवजन और दुबलेपन जैसी समस्याओं में भी सुधार दर्ज किया गया है। टीएचआर को आंगनबाड़ी सेवाओं से जोड़ा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां लाभार्थियों को पोषण सामग्री देने के साथ बच्चों का वजन लेने, उनके विकास की निगरानी करने और गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी परामर्श देने का काम कर रही हैं। परिवारों को संतुलित आहार और पोषण के महत्व के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

योजना की एक अहम विशेषता इसे महिला सशक्तीकरण से जोड़ना है। टीएचआर के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। वर्तमान में 4 हजार से अधिक महिलाएं उत्पादन इकाइयों से जुड़कर रोजगार पा रही हैं। इससे गांवों में महिलाओं को आय का अवसर मिलने के साथ स्वयं सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियां भी मजबूत हुई हैं।

गुणवत्ता और स्वच्छता पर सख्ती
बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि पोषाहार की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। खाद्य सामग्री की अच्छी तरह सफाई, हरी सब्जियों को दो-तीन बार पानी से धोना और बच्चों को परोसने से पहले कम से कम दो वयस्कों से भोजन की गुणवत्ता की जांच कराना अनिवार्य किया गया है। पिछले नौ वर्षों में पोषण सेवाओं को डिजिटल निगरानी, पारदर्शी वितरण और महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया है। टीएचआर मॉडल के जरिए सरकार पोषण और महिला आजीविका, दोनों को एक साथ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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