Moradabad News : किसानों को मिलेगी सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टर की सौगात

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
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मंडल के सभी पांचों जिलों में कम समय और कम लागत में होगी गन्ने की कटाई, हरी पत्तियों और अवशेषों का खेत में ही मल्चिंग करेगा हार्वेस्टर

मुरादाबाद मंडल के पांचों जिलों के गन्ना किसानों को जल्द ही अत्याधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टर की सौगात मिलेगी। इससे कटाई में समय और लागत दोनों की बचत होगी।

मुरादाबाद, अमृत विचार। मुरादाबाद मंडल के प्रत्येक जनपद को एक-एक अत्याधुनिक सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टर (स्वचालित गन्ना कटाई मशीन) की सौगात दी जा रही है। उत्तर प्रदेश शासन की गाइडलाइन के अनुरूप प्रदेश की सहकारी गन्ना विकास समितियों, गन्ना विकास परिषदों के माध्यम से रामपुर, बिजनौर, संभल, अमरोहा तथा मुरादाबाद में कुल पांच हार्वेस्टर क्रय किए जा रहे हैं।

उप गन्ना आयुक्त परिक्षेत्र हरपाल सिंह ने शनिवार को बताया कि जहां समितियों की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी, वहां सरकार अनुदान के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराएगी, जिससे सभी गन्ना उत्पादक जिलों को मशीनीकरण का लाभ मिल सके। गन्ने की खेती में बढ़ती मजदूर-तंगदी, कटाई संयंत्रों की कमी और बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टरों द्वारा प्रति पेराई सत्र कम से कम 450 एकड़ तक गन्ने की कटाई संभव होगी।उन्होंने तकनीकी लाभ के बारे में बताते हुए कहा कि मशीनें भूमि की सतह के बेहद समीप से कटाई करती हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर 20-25 क्विंटल तक अतिरिक्त उपज मिलने का अनुमान है। इसका कारण है कि जड़ के नजदीक कटने पर गन्ने का सबसे वजनदार हिस्सा बचता है और मिलों को उच्च चीनी परता रिकवरी प्राप्त होती है। इसका किसानों को साधा आर्थिक लाभ मिलता है।

उन्होंने बताया कि सटीक कटाई से खेत में आरएमडी (रेटून मैनेजमेंट डिवाइस) की क्रिया पूर्ण होती है, जिससे अगले चक्रीय फसल (पेड़ी) के लिए पेड़ी प्रबंधन बेहतर होता है और पेड़ी की उपज में वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त, हार्वेस्टर खेत में हरी पत्तियों और अवशेषों का मौके पर मल्चिंग कर देते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार आता है। उप गन्ना आयुक्त ने कहा कि इन मशीनों के आगमन से श्रम-संबंधी समस्याओं जैसे मजदूरों की कमी और कटाई के समय मजदूरी के ऊंचे दाम से स्थायी रूप से निजात मिलेगी। यह मशीनें बड़े क्षेत्र की कटाई और छिलाई बहुत कम समय में कर सकती हैं। छोटे और सीमांत किसानों के लिए उम्मीद भी जताई और कहा कि यदि वर्तमान में बड़े केन हार्वेस्टर महंगे हों तो कंपनियां मिनी केन हार्वेस्टर के विकास पर काम कर रही हैं। भविष्य में मिनी हार्वेस्टर उपलब्ध होने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर समितियों के फार्म मशीनरी बैंकों में दिया जाएगा, ताकि छोटे किसान भी यंत्रीकरण का लाभ उठा सकें।

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