मां गंगा की बाढ़ में डूबे लेटे हनुमान, गर्भगृह में पहुंचते ही गूंजे मंत्रोच्चार; श्रद्धालु इसे मानते हैं शुभ संकेत
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के बीच देर रात दो बजे एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसे श्रद्धालु और संत समाज बेहद शुभ मानते है। प्रयागराज के प्रसिद्ध श्री लेटे हनुमान जी मंदिर में मां गंगा का जल गर्भगृह तक पहुंच गया।
मान्यता है कि जब गंगा का पानी गर्भगृह में पहुंचता है, तो इसे मां गंगा द्वारा अपने पुत्र बजरंगबली को स्नान कराने का अद्भुत अवसर माना जाता है। जैसे ही गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों से आगे बढ़ते हुए गर्भगृह तक पहुंचा, मंदिर के महंत और साधु-संतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गंगा का स्वागत किया।
माँ गंगा का किया अभिनंदन
मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की गई. दूध, दही, घी और पंचामृत अर्पित कर मां गंगा का अभिनंदन किया गया। वहीं ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच 'हर-हर गंगे', 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और गंगा की लहरों में समा गए लेटे हनुमान जी धीरे-धीरे गंगा का जल गर्भगृह में भरता गया और देखते ही देखते शयन अवस्था में विराजमान लेटे हनुमान जी की प्रतिमा गंगा जल में पूरी तरह समा गई।
धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना गया गंगा का स्पर्श
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दृश्य अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि मां गंगा के इस पावन स्पर्श से सुख, समृद्धि और मंगल का आगमन होता है और इस दुर्लभ क्षण के दर्शन को सौभाग्य की बात माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि मां गंगा के स्नान करने के बाद देश में कोई भी आपदा वह मुसीबत नहीं आती है।
पूजा अर्चना कर कपाट किये गए बंद
पूजा-अर्चना और आरती की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। अब मां गंगा की लहरों के बीच बजरंगबली के इस अद्भुत स्वरूप को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। संगम नगरी प्रयागराज से ये तस्वीरें सिर्फ एक धार्मिक दृश्य नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और मां गंगा के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा की तस्वीर बयां कर रही हैं।
