कौशांबी में पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, 11 की मौत... मुख्य आरोपी नौशाद एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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गोदाम पर चला बुलडोजर

लाइसेंस 2024 में रद्द होने के बावजूद चल रही थी फैक्टरी; विस्फोट से फैक्टरी तबाह और आसपास के छह घर क्षतिग्रस्त, घायलों को चारपाई पर लादकर पहुंचाया गया अस्पताल

कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में सोमवार, 31 अगस्त 2026 को पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें आठ बच्चे शामिल हैं। पांच अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने मंगलवार, 1 सितंबर की सुबह करीब चार बजे मुठभेड़ के बाद मामले के मुख्य आरोपी नौशाद को गिरफ्तार कर लिया।

अधिकारियों के मुताबिक, जिस पटाखा फैक्टरी में यह हादसा हुआ, उसका लाइसेंस वर्ष 2024 में ही रद्द हो चुका था। इसके बावजूद वहां पटाखों का कारोबार कैसे जारी रहा, अब इसको लेकर जांच की जा रही है। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की इमारत पूरी तरह ढह गई। आसपास के छह मकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

भागते समय पुलिस से मुठभेड़, आरोपी घायल

पुलिस ने मुख्य आरोपी को पकड़ने के लिए चार टीमें गठित की थीं। मंगलवार तड़के करीब चार बजे पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी भागने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद चरवा थाना क्षेत्र में 13 मील सराय सहावा रोड पर पुलिस टीम ने घेराबंदी की।

पुलिस के मुताबिक, खुद को घिरा देखकर आरोपी ने टीम पर गोली चला दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से वह घायल हो गया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान मनौरी निवासी नौशाद पुत्र निजामुद्दीन के रूप में बताई। पुलिस ने उसे तत्काल मंझनपुर जिला अस्पताल पहुंचाया। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

आरोपी के पटाखा गोदाम पर चला बुलडोजर

हादसे के बाद प्रशासन ने भी बड़ी कार्रवाई की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम अमित पाल के आदेश से घटनास्थल से करीब 400 मीटर दूर स्थित आरोपी नौशाद के पटाखा गोदाम को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया गया।

प्रशासन ने गोदाम की जांच के बाद देर शाम उसे जमींदोज किया। डीएम ने कहा कि आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, नौशाद ने घटनास्थल के पास ही पटाखों का गोदाम बना रखा था।

2024 में ही खत्म हो चुका था फैक्टरी का लाइसेंस

डीएम ने बताया कि पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस 2024 में ही समाप्त हो चुका था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्टरी का संचालन कैसे जारी रहा।

प्रशासन अब फैक्टरी और गोदाम से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि हादसे के लिए कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं। अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

दोपहर 12 बजे शुरू हुआ धमाकों का सिलसिला

हादसा पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी बाजार में सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। बताया गया कि पटाखा फैक्टरी में अचानक आग लग गई। आग फैलते ही वहां रखे पटाखों में लगातार तेज धमाके होने लगे।

धमाकों की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कुछ ही देर में फैक्टरी से उठता धुएं का गुबार आसपास के इलाके में फैल गया। बाजार में अफरा-तफरी मच गई। विस्फोट की चपेट में आकर कई परिवारों के मकान भी धराशायी हो गए।

हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब पांच लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। इनमें तीन लोग वेंटीलेटर पर हैं। झुलसे लोगों को इलाज के लिए प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया।

एंबुलेंस का इंतजार करते रहे घायल, फिर चारपाई पर अस्पताल पहुंचे

हादसे के बाद घायलों को कौशांबी से प्रयागराज स्थित स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस की कमी की बात सामने आई। पीड़ितों के मुताबिक, करीब एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया। मदद नहीं मिलने पर घायलों को पिकअप वाहन से अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया।

स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने के कारण घायलों को चारपाई पर लादकर अस्पताल पहुंचाया गया। पिकअप वाहन से चार घायल एसआरएन अस्पताल पहुंचे। इनमें 13 वर्षीय प्रवीण सिंह और पांच वर्षीय प्रांजली की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।

पीड़िता रूपा ने पटाखा स्टोरेज संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

एसआरएन में सफाई कर्मियों ने संभाला स्ट्रेचर

घायलों के अस्पताल पहुंचने के बाद एसआरएन अस्पताल की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। ट्रॉमा सेंटर के बाहर सफाई कर्मी स्ट्रेचर ले जाते नजर आए। बताया गया कि ट्रॉमा सेंटर के बाहर 10 सफाई कर्मियों को स्ट्रेचर ढोने के लिए लगाया गया था।

ट्रॉमा सेंटर के ट्रायज रूम में ड्रेसिंग का सामान पहुंचाने के लिए भी कई सफाई कर्मी तैनात दिखाई दिए। जबकि अस्पताल में 185 वार्ड बॉय कार्यरत बताए गए हैं।

कार्रवाई के बावजूद नहीं रुका बारूद का कारोबार

कौशांबी और प्रयागराज में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ पहले भी समय-समय पर कार्रवाई होती रही है। इसके बावजूद रिहायशी इलाकों में इस तरह के कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई।

वर्ष 2024 में कौशांबी के भरवारी में भी पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट हुआ था। उस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।

दो साल के भीतर इसी तरह की एक और बड़ी घटना ने प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल सिर्फ कार्रवाई करने का नहीं, बल्कि कार्रवाई के बाद अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण को दोबारा शुरू होने से रोकने का भी है।

सीएम योगी ने घोषित की आर्थिक सहायता

घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार सुनिश्चित करने और राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

डिप्टी सीएम केशव मौर्य अस्पताल पहुंचे

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने घटना का तत्काल संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और प्रभावितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रयागराज और कौशांबी के जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। घायलों के एसआरएन अस्पताल में उपचार की जानकारी मिलने पर उपमुख्यमंत्री अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से उनकी स्थिति और उपचार की जानकारी लेते हुए बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मौर्य ने पुलिस अधीक्षक कौशांबी को घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

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