बरेली: दो हजार रुपये खर्च कर दिखावे के समाज सुधारक बनने वालों की लंबी फौज
राकेश शर्मा, बरेली। समाज में विभिन्न तरह से सुधार लाने का चोला ओढ़ने वाली समितियों की लंबी फेहरिस्त है। कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के आंकड़ों की बात करें तो जनपद में 30 हजार समितियां पंजीकृत हुई हैं। इतनी समितियां यदि समाज हित में काम करें तो गली-मोहल्ला शिक्षा और स्वच्छता की अलख …
राकेश शर्मा, बरेली। समाज में विभिन्न तरह से सुधार लाने का चोला ओढ़ने वाली समितियों की लंबी फेहरिस्त है। कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के आंकड़ों की बात करें तो जनपद में 30 हजार समितियां पंजीकृत हुई हैं। इतनी समितियां यदि समाज हित में काम करें तो गली-मोहल्ला शिक्षा और स्वच्छता की अलख जगाते नजर आएंगे, लेकिन इसमें से 15 हजार समितियां कुछ कार्य नहीं कर रही हैं। इन्होंने एक बार पंजीकरण कराकर दोबारा नवीनीकरण नहीं कराया, इसलिए अपंजीकृत हो गईं हैं।
वर्तमान में ये समितियां समाज में क्या कार्य कर रही हैं। समिति चलाने वालों का मुख्य उद्देश्य क्या है, इसकी जानकारी न तो सहायक रजिस्ट्रार को है और न ही इसका लेखा-जोखा कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार में है। समितियों की लंबी फेहरिस्त सिर्फ 2000 रुपये खर्च करके तैयार हुई है।
कहने का मतलब साफ है कि छोटी रकम खर्च करके समितियां बनाने वाले जिम्मेदार दिखावे के समाज सुधारक बने हुए हैं। इनके कार्य न तो समाज में दिख रहे हैं और न ही समाज को दिशा देने में इनकी कोई भूमिका दिख रही है। सिर्फ जाति का झंडा चंद लोगों को साथ लेकर बुलंद करने के लिए ये समितियां खोली गईं हैं। समिति बनाने से लेकर दो वर्ष के बाद इनकी नवीनीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन समितियों ने न नवीनीकरण कराया है और न ही समितियों के खर्च का ब्योरा कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार में प्रस्तुत किया है। एक बार पंजीकरण कराकर समितियों के जिम्मेदारों ने सहायक रजिस्ट्रार की तरफ झांका तक नहीं है।
सहायक रजिस्ट्रार बोले-समितियां स्वत: अपंजीकृत हो गईं
फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के सहायक रजिस्ट्रार अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में 15 हजार समितियां अपंजीकृत हैं। इसमें से बड़ी संख्या में एक ही जाति की तीन से चार समितियां बनी हुई हैं। समिति पंजीकरण एक्ट में नवीनीकरण न कराने वाली समितियों के विरुद्ध कार्रवाई होने के सवाल पर सहायक रजिस्ट्रार कहते हैं कि कार्रवाई कुछ नहीं हुई है। समितियां क्या कर रही हैं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।
इस एक्ट के तहत होता है समिति का पंजीकरण
समिति का पंजीकरण सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के तहत होता है। समिति के सचिव की ओर से संस्था के लिए एक औपचारिक आवेदन पत्र के साथ सादे मोटे कागज के केवल एक ही ओर लिखित कराकर देना होता है। समिति के स्मृति पत्र, नियमावली, शुल्क 2000 रुपये नकद या बैंक ड्राफ्ट तथा संस्था के पूर्व में पंजीकृत न होने संबंधी नोटरी शपथपत्र भी लगाना होता है। उपरोक्त कागजातों के आवेदन संबंधित मंडलीय कार्यालय में जमा किया जाता है। पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी होने पर ही समिति पंजीकृत मानी जाती है।
यह है नवीनीकरण का नियम
प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त होने की तिथि से एक वर्ष के बाद नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जाता है। उसके लिए रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति जरूरी है। विलंब के कारणों का उल्लेख करते हुए प्रार्थना, शपथपत्र व 1000 रुपये अनुमति शुल्क प्रस्तुत करना होता है। सहायक रजिस्ट्रार के अनुमति जारी किए जाने के बाद नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जा सकेगा। नवीनीकरण के दौरान कौन-कौन से कार्यकलाप किए जा रहे हैं, इसका ब्योरा भी दर्ज करना होगा। प्रत्येक प्रपत्र पर समिति की पत्रावली संख्या अनिवार्य है।
