हल्द्वानी: डीएम सैब मि बोत थक ग्यूं, आब पेंशन लगे दियो हो…..

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दीपिका नेगी, हल्द्वानी। साहब कब से पेंशन के लिए यहां-वहां भटक रहा हूं। कोई सुनता नहीं…ग्राम प्रधान ने राशन कार्ड भी फाड़ दिया। कागजों की ज्यादा जानकारी नहीं रखता। जो है उन्हें लेकर इधर-उधर भटकर रहा हूं, किसी तरह मेरी वृद्धावस्था पेंशन का कागज बन जाए तो… सैब मि बोत थक ग्यूं, आब पेंशन लगे …

दीपिका नेगी, हल्द्वानी। साहब कब से पेंशन के लिए यहां-वहां भटक रहा हूं। कोई सुनता नहीं…ग्राम प्रधान ने राशन कार्ड भी फाड़ दिया। कागजों की ज्यादा जानकारी नहीं रखता। जो है उन्हें लेकर इधर-उधर भटकर रहा हूं, किसी तरह मेरी वृद्धावस्था पेंशन का कागज बन जाए तो… सैब मि बोत थक ग्यूं, आब पेंशन लगे दियो हो….. डीएम कार्यालय में गुहार लगाते एक 73 वर्षीय बुजुर्ग के यही शब्द थे…अपने कुछ पुराने और फटे कागजों को एक झोले में समेटे बुजुर्ग आंखों में उम्मीद लिए डीएम साहब के आने का इंतजार कर रहा था। साहब की प्रेस कांफ्रेंस थी तो उन्हें तहसील में बने सहायक समाज कल्याण अधिकारी के दफ्तर का पता देकर वहां भेज दिया गया।

तहसील में अपने कागज लेकर जब बुजुर्ग पहुंचे तो पता चला दिन होने के बावजूद भी वहां आज समाज कल्याण के अधिकारी बैठे ही नहीं। चेहरा और मायूस हो गया। पूछने पर उन्होंने बताया कि उनका नाम वासुदेव जोशी है। ग्राम किशनपुरा घुड़दौड़ा के रहने वाले हैं। काफी समय से बुजुर्ग सम्मान भत्ता के रूप में सरकार की ओर से दी जाने वाली वृद्ध पेंशन का प्रमाण पत्र बनाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।

बताया कि इस संदर्भ में उन्होंने जब अपने ग्राम प्रधान ललित नेगी से भी सहयोग मांगा तो उन्होंने उनका राशन कार्ड ही फाड़ दिया। किसी तरह मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं। पत्नी की भी 16 साल पहले मृत्यु हो चुकी है। दो बेटे हैं, वो भी मजदूरी कर रहे हैं। पेंशन का सहारा मिल जाता तो कुछ हो जाता। इतनी दूर बार-बार आने में किराया-भाड़ा भी लगता है। पता चला कि अब मंगलवार को गणतंत्र दिवस पर भी तहसील में समाज कल्याण का दफ्तर बंद रहेगा। ऐसे में अगले शनिवार को ही उन्हें आना होगा।

12 सौ रुपये की मिलती है सहायता
बता दें कि समाज कल्याण विभाग की ओर से 60 वर्ष की उम्र पार करने वाले पात्र बुजुर्गों को 1200 रुपये  प्रतिमाह के हिसाब से धनराशि दी जाती है। यह राशि अभी तिमाही किस्त के रूप में दी जा रही है।

न दफ्तर में नजर आते हैं, न ही फोन उठाते हैं समाज कल्याण अधिकारी
तहसील में बने समाज कल्याण विभाग के दफ्तर में अक्सर विभाग के अधिकारी तय दिन होने के बावजूद नहीं आते। ऐसे में यहां पेंशन व अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी और कागजी कार्रवाई कराने आने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं फोन करने पर भी यहां के अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाता।

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