बरेली: नगर निगम की अधूरी कार्रवाई, भूमि पर बिना कुछ लिखे बोर्ड लगाए
अमृत विचार, बरेली। अक्षर विहार तालाब की 2191 वर्ग मीटर भूमि को प्रशासनिक अधिकारियों ने खाली कराकर नगर निगम को कब्जा दिलाया लेकिन नगर निगम के अधिकारी भूमि को संरक्षित नहीं कर रहे हैं। नगर निगम की अधूरी कार्रवाई की वजह से ही पहले तालाब की भूमि पर कब्जा हुआ था। शुक्रवार को खाली कराई …
अमृत विचार, बरेली। अक्षर विहार तालाब की 2191 वर्ग मीटर भूमि को प्रशासनिक अधिकारियों ने खाली कराकर नगर निगम को कब्जा दिलाया लेकिन नगर निगम के अधिकारी भूमि को संरक्षित नहीं कर रहे हैं। नगर निगम की अधूरी कार्रवाई की वजह से ही पहले तालाब की भूमि पर कब्जा हुआ था। शुक्रवार को खाली कराई भूमि पर नगर निगम ने स्टैंड बोर्ड तो लगाए लेकिन उस पर लिखा कुछ नहीं। सफेद पेंट से पोतकर दोनों तरफ की भूमि पर बोर्ड लगा दिए जबकि नगर निगम को बोर्ड पर ‘यह नगर निगम की संपत्ति है’ लिखना चाहिए था ताकि दोबारा कब्जा न हो सके।
वहीं, इस भूमि के तालाब की भूमि होने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। 1 जुलाई, 2020 को तहसील सदर के नायब तहसीलदार ने भूमि की पैमाइश कर जो रिपोर्ट दी थी उसमें स्पष्ट लिखा है कि तालाब की भूमि पर किसी का कोई कब्जा नहीं है। फ्री-होल्ड धारकों के कब्जे में जो भूमि है वह फ्री-होल्ड कराई गई भूमि है। इससे पहले नगर निगम ने तालाब की चपेट से जो नाला निर्माण कराया वह फ्री-होल्ड हुई भूमि पर कराया। ऐसा भूमि खरीदने वाले लोगों का दावा है। नगर निगम ने एनओसी भी दी थी।
इधर प्रिंस छाबड़ा वाली भूमि के प्रकरण में 2013 में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) शिशिर ने बरेली विकास प्राधिकरण को लिखे पत्र में साफ कहा था कि यह भूमि न नजूल है न तालाब की। सीलिंग में भी दर्ज नहीं है। भूमि तालाब की नहीं होने के संबंध में नगर निगम और बीडीए एनओसी भी जारी कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि तहसील की रिपोर्ट झूठ कह रही है या अधिकारी झूठ बोल रहे हैं।
हालांकि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व मनोज कुमार पांडेय का साफ कहना है कि कब्जे से खाली कराई भूमि तालाब की भूमि है। जो कभी जलमग्न थी और मिट्टी डालकर पाट दिया था। एडीएम से फ्री-होल्ड गलत होने के संबंध में बात की, तब बोले-10582 वर्ग मीटर भूमि फ्री-होल्ड हुई थी। खाली कराई गई 2191 वर्ग मीटर भूमि फ्रीहोल्ड से बाहर है।
