बरेली: सिविल लाइंस व आसपास की हवा खराब, एक्यूआई 300 के पास, पढ़ें पूरी खबर

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अमृत विचार, बरेली। शहर की हवा प्रदूषित होती जा रही है। जाम, सीवरेज की दिक्कत दूर करने के लिए शहर में बनाए जा रहे फ्लाईओवर और भूमिगत बिछाई जा रही सीवर लाइन के लिए सड़कों की खुदाई ने हवा को और प्रदूषित कर दिया है। सर्दी में यह हाल है। गर्मी में इससे ज्यादा हाल …

अमृत विचार, बरेली। शहर की हवा प्रदूषित होती जा रही है। जाम, सीवरेज की दिक्कत दूर करने के लिए शहर में बनाए जा रहे फ्लाईओवर और भूमिगत बिछाई जा रही सीवर लाइन के लिए सड़कों की खुदाई ने हवा को और प्रदूषित कर दिया है। सर्दी में यह हाल है।

गर्मी में इससे ज्यादा हाल खराब होंगे, ऐसी स्थिति बनती दिख रही है। इसका असर कई तरह से लोगों के स्वास्थ्य पर ही पड़ेगा। सबसे ज्यादा दिक्कत धूल के कणों से होगी। खुदाई की वजह से सिविल लाइंस व आसपास के एरिया में वायु प्रदूषण का स्तर यानी एक्यूआई 300 के करीब पहुंच गया है। आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा।

पर्यावरणविदों ने इसे लेकर चेतावनी जारी की है। शनिवार को मौसम साफ होने के साथ तेज हवा चली तो सड़कों पर धूल उड़ते नजर आई। इसका असर भी दिखने लगा है। बरेली कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के एमिरेट प्रोफेसर डा. दिनेश शर्मा ने बताया कि शहर में निर्माण कार्य की वजह से प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी हुई है।

शहर की हवा खराब हो रही है। गर्मियों में हवा चलने पर धूल अधिक उड़ेगी। इसकी वजह से एक्यूआई और अधिक बढ़ेगा। दो दिनों पहले डेलापीर एरिया में एक्यूआई 260, राजेंद्र नगर में 210 जबकि सिविल लाइंस व चौपुला एरिया में यह 300 के आसपास पहुंच गया। धूल उड़ने से लोगों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो रही है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक एसएस चौहान ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान पानी का छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी या धूल के कण बाहर न आएं इसके लिए एरिया को कवर करना चाहिए। शहर में निर्माण कार्य की वजह से सिविल लाइंस एरिया में प्रदूषण का स्तर बढ़ा है।

गर्मियों में धूल की वजह से सांस लेने वालों को काफी दिक्कत होगी। प्रदूषण कंट्रोल के नियमों का पालन न करने की वजह से जल निगम और सेतु निगम पर नगर निगम ने एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड भी कई बार नोटिस दे चुका है।

ज्यादा दिक्कत सुबह 9 से 11 बजे, शाम को 4 से 6 बजे तक होती है
बरेली कॉलेज के पर्यावरण विभागाध्यक्ष डा. एपी सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य व्यवस्थित तरीके से हों तो कोई दिक्कत न हो। सभी संस्थाएं एक साथ एक एरिया में ब्लॉक लगाकर काम करें तो कोई दिक्कत नहीं होगी। पूरे शहर में एक साथ निर्माण कार्य की वजह से ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ जाती है।

जो रास्ता 10 मिनट में तय किया जा सकता है, उसे आधा घंटा से अधिक समय लगता है। इसकी वजह से वाहनों से अधिक देर तक धुंआ निकलता है जिससे भी प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। साथ ही ईंधन भी अधिक खर्च होता है। सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह 9 से 11 बजे और शाम को 4 से 6 बजे होती है क्योंकि सुबह के वक्त लोग घरों से काम के लिए निकलते हैं और शाम के वक्त लौटते हैं। इस वक्त प्रदूषण भी काफी बढ़ जाता है। धूल में छोटे कण होते हैं जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। बड़े शहरों की तरह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें और रात के समय काम करें तो ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।

कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के लिए भी होगी दिक्कत
कोरोना को मात दे चुके लोगों के लिए आने वाले दिनों में निर्माण कार्य की वजह से उड़ने वाले धूल के कण मुसीबत बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन्हें कोरोना हुआ उनके फेफड़े प्रभावित हुए हैं। जिन लोगों को सांस लेने में दिक्कत है उन्हें इस एरिया में संभलकर निकलना होगा।

मौजूदा समय में कोरोना वैक्सीन आने और मरीजों की कम संख्या की वजह से मास्क लगाना छोड़ दिया है जबकि भविष्य में मास्क लगाना लोग जारी रखें क्योंकि इससे धूल के कण अंदर नहीं जाएंगे और सांस लेने में दिक्कत नहीं होगी। निर्माण कार्य वाली जगहों से लोग जाम में फंसेंगे तो गाड़ियों से काफी देर तक जहरीला धुंआ निकलेगा। इससे भी दिक्कत होने वाली है।

वायु प्रदूषण के बजट से हो सकता है सुधार
वायु प्रदूषण को लेकर सरकार भी गंभीर है। यही वजह है कि पहली बार 2217 करोड़ रुपये का बजट वायु प्रदूषण के लिए जारी किया गया है। इस बजट को 10 लाख से अधिक आबादी वाले 42 शहरों के लिए जारी किया गया है। औसतन एक शहर के हिस्से में करीब 50 करोड़ रुपये हवा की शुद्धता को ठीक करने के लिए मिलेंगे।

इस बजट के जरिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। बरेली शहर की आबादी 10 लाख से अधिक है और यहां के प्रदूषण का स्तर भी लगातार खराब हो रहा है। ऐसे में बजट से बरेली को भी रकम मिल सकती है। इस बजट से वर्ष 2024 तक प्रदूषण के स्तर को 30 फीसदी तक कम किया जाएगा। इसके अलावा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम भी चलाया जाएगा। क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रोहित सिंह ने बताया कि अभी कितना बजट मिलेगा और इसका कैसे इस्तेमाल किया जाएगा इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। बजट मिलने पर प्रदूषण नियंत्रण में इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

निर्माण कार्य के दौरान धूल न उड़े, इसके लिए पानी का छिड़काव करना होता है। इसके अलावा ग्रीन कवर लगाना जरूरी है। नियमों का पालन न करने पर नोटिस भी भेजे गए हैं और जुर्माना भी लग चुका है। आने वाले दिनों में धूल उड़ने से दिक्कतें होंगी। पूरी मॉनिटरिंग की जा रही है। -रोहित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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