हल्द्वानी: अब शराब की हर बोतल होगी ‘ट्रेक एंड ट्रेस’
अंकुर शर्मा, अमृत विचार। उत्तराखंड में शराब की तस्करी और मिलावट करना आसान नहीं होगा। इनकी रोकथाम के लिए आबकारी विभाग उप्र, बंगाल की तर्ज पर ‘ट्रेक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस सिस्टम की मदद से शराब की हर बोतल को डिस्टलरी से रिटेल दुकान के काउंटर पहुंचने तक ट्रेक एंड …
अंकुर शर्मा, अमृत विचार। उत्तराखंड में शराब की तस्करी और मिलावट करना आसान नहीं होगा। इनकी रोकथाम के लिए आबकारी विभाग उप्र, बंगाल की तर्ज पर ‘ट्रेक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस सिस्टम की मदद से शराब की हर बोतल को डिस्टलरी से रिटेल दुकान के काउंटर पहुंचने तक ट्रेक एंड ट्रेस किया जा सकेगा।
इसके साथ ही शराब की असली या नकली की पहचान, दाम, बनने की तिथि आदि जानकारियां भी मिलेंगी। नए सिस्टम की बारीकियां समझने और लागू करने के लिए प्रदेश भर के आबकारी अधिकारियों को ट्रेनिंग दी गई है। देहरादून स्थित मुख्यालय में इस सिस्टम को लागू करने के लिए जोर शोर से तैयारियां की जा रही है। यह सिस्टम नेशनल इंफार्मेशन सेंटर बंगाल की मदद से बनाया जा रहा है। जबकि होलोग्राम नासिक से बनवाया जाएगा। नए वित्तीय साल 2021-22 तक इस ‘ट्रेक एंड ट्रेस’ सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
= ऐसे काम करेगा ‘ट्रेक एंड ट्रेस सिस्टम’ =
आबकारी अधिकारियों के अनुसार इस सिस्टम के लिए एक सॉफ्टवेयर और पब्लिक के लिए एप होगी। इसमें शराब की बोतल के ढक्कन और रैपर पर एक क्यूआर कोड होगा। सबसे पहले डिस्टलरी में शराब की बोतल बनने पर क्यूआर कोड को स्कैन किया जाएगा। फिर एफएल-टू में पहुंचने पर इस कोड को स्कैन किया जाएगा। यहां से दुकान पहुंचने पर एक बार फिर कोड स्कैन होगा। जहां डिस्टलरी में शराब बोतल पैक होने पर क्यूआरकोड को स्कैन किया जाएगा।
फिर एफएल टू में शराब की बोतल पहुंचेगी तो स्कैन की जाएगी, यहां से दुकान पहुंचने पर स्कैन की जाएगी। इधर आबकारी विभाग की एप से शराब की बोतल के ढक्कन और रैपर पर लगे क्यूआर कोड को एप से स्कैन करते ही शराब बनने का स्थान, तिथि, दाम, गुणवत्ता, जिस दुकान से बिकी उसका विवरण आदि सभी जानकारियां मोबाइल स्क्रीन पर होंगी। इससे साफ हो जाएगा कि यह शराब असली या नकली है। जीपीएस तकनीकी भी इस्तेमाल की जाएगी ताकि हर बोतल को ट्रेस किया जा सके।
= ये होंगे फायदे =
= क्यूआर कोड स्कैन होने से असली नकली का पता चलेगा इसलिए मिलावट पर शिकंजा कसेगा
= बोतल के ट्रेस होने से तस्करी पर भी लगाम कसेगी
= यदि तस्कर किसी तरह नकली क्यूआर कोड चिपका भी दे तो एप पर जानकारी नहीं आएगी इससे नकली शराब पर भी नकेल कसेगी
= दाम आदि पूरा ब्योरा होने पर ओवर रेटिंग पर भी लगाम कसेगी
= एक दुकान/बार का माल कहीं और खपाने पर भी लगेगा शिकंजा
आबकारी तस्करी व मिलावट रोकने के लिए पहली बार ट्रेक एंड ट्रेस सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसकी सारी तैयारियां मुख्यालय स्तर पर हो रही हैं। नए वित्तीय वर्ष में ट्रेक एंड ट्रेस सिस्टम लागू किया जाएगा।
– रेखा जुयाल भट्ट, जिला आबकारी अधिकारी, नैनीताल
