हल्द्वानी: एक अप्रैल से हर बिल पर टर्नओवर के अनुसार देना होगा चार एवं छह अंकों का कोड
हल्द्वानी, अमृत विचार। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल ने नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में सालाना डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को बिल में एचएसएन कोड अंकित करने की दी छूट समाप्त कर दी है। अब कारोबारियों को ग्राहकों के बिल में एचएसएन कोड लिखना अनिवार्य है। राज्य कर अधिकारियों के अनुसार जब …
हल्द्वानी, अमृत विचार। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल ने नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में सालाना डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को बिल में एचएसएन कोड अंकित करने की दी छूट समाप्त कर दी है। अब कारोबारियों को ग्राहकों के बिल में एचएसएन कोड लिखना अनिवार्य है।
राज्य कर अधिकारियों के अनुसार जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू किया गया था। तब जीएसटी में हर कमोडिटी (बिक्री की जाने वाली वस्तु) के लिए एक कोड लागू किया गया था। शुरूआत में सालाना डेढ़ करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए बिलों में एचएसएन कोड लिखना अनिवार्य नहीं था। सिर्फ सालाना डेढ़ करोड़ से अधिक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को यह कोड अंकित करना होता था। इधर जीएसटी काउंसिल ने नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में इस रियायत को समाप्त कर दिया है। जीएसटी ने कारोबारियों को दो श्रेणियों सालाना पांच करोड़ से ज्यादा और पांच करोड़ से कम में बांट दिया है।
नए नियम के अनुसार पांच करोड़ से कम टर्नओवर वाले कारोबारी को व्यापारी एवं ग्राहकों को दिए जाने वाले बिलों में चार अंकों का एचएसएन कोड देना अनिवार्य कर दिया है। वहीं सालाना पांच करोड़ से अधिक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को छह अंकों का कोड देना होगा। ऐसा नहीं करने पर कारोबारियों को जुर्माना देना होगा।
अभी इनके लिए है एचएसएन कोड का विकल्प
राज्य कर विभाग के अनुसार ऐसे कारोबारी जिनका सालाना डेढ़ करोड़ से कम का टर्नओवर है लेकिन वे व्यापारी नहीं सीधे ग्राहकों को माल बेचते है। ऐसे कारोबारियों के लिए बिल में एचएसएन कोड लिखने का विकल्प है। वह स्वयं फैसला ले सकते हैं कि कोड लिखे या नहीं ।
क्या कहते हैं अधिवक्ता
वाणिज्य एवं आयकर अधिवक्ता सुमित गुप्ता का कहना है कि एचएसएन कोड अनिवार्य होने से ऐसे कारोबारी जो जनरल मर्चेंट का काम करते हैं या जो मल्टी सेलिंग करते हैं उनकी परेशानियां बढ़ जाएंगी। क्योंकि एक-एक बिल में दस से ज्यादा वस्तुएं होती हैं। इससे एक-एक कमोडिटि एचएसएन कोड लिखने में भारी परेशानी होगी। वहीं बेवजह व्यापारियों को झंझट होगा।
क्या कहते हैं व्यापारी
प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जीएसटी प्रभारी राजेश अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की तकनीकी खामियों से पहले से ही व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस नियम से व्यापारियों की समस्या बढ़ जाएंगी। इस नियम से एक-दो कमोडिटी रखने वालों के लिए ठीक है लेकिन बाकी व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
