हल्द्वानी: थानों-चौकियों में पौधरोपण का फरमान, गर्मियों में पानी कहां से लाएंगे साहेबान
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के एक फरमान ने गर्मी के सीजन में आशंकित जल संकट के बीच हलक सुखा दिया है। डीजीपी ने जिले के सभी अधीनस्थों को अपने परिसरों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने का फरमान दिया है। पौधरोपण की सोच सही है, लेकिन इसके समय को लेकर …
गौरव पांडेय, हल्द्वानी। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के एक फरमान ने गर्मी के सीजन में आशंकित जल संकट के बीच हलक सुखा दिया है। डीजीपी ने जिले के सभी अधीनस्थों को अपने परिसरों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाने का फरमान दिया है। पौधरोपण की सोच सही है, लेकिन इसके समय को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
बड़ा सवाल है कि गर्मी के सीजन में पहाड़ से लेकर भाबर और तराई तक मानव बस्तियां पेयजल उपलब्धता के संकट से जूझती हैं। उन्हें पेयजल उपलब्धता के न्यूनतम मानक का 50 फीसदी पानी तक नहीं मिल पाता। ऐसे में रोपे गए पौधों को सींचने के लिए पानी कहां से आएगा। प्रतीत हो रहा है कि शीर्ष पुलिस नौकरशाह ने यह फरमान जारी करने से पहले गर्मी के सीजन में राज्य के जलसंकट का ख्याल नहीं रखा।
शनिवार को डीजीपी ने सभी 13 जिलों के पुलिस कप्तानों को फरमान जारी किया है। इसके तहत रिजर्व पुलिस लाइन के साथ ही सभी जिलों के थाना-चौकियों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाना प्रस्तावित है। राज्य भर के पुलिस कप्तानों की तरह नैनीताल एसएएसपी ने भी डीजीपी के आदेश को शिरोधार्य मानकर रिजर्व पुलिस लाइन से पौधरोपण अभियान की शुरूआत भी कर दी। इसके तहत लाइन में जगह-जगह पौधे रोपे गए। पौधे तो रोप दिए गए, अब सवाल इनकी सिंचाई का है।
आम नागरिक से लेकर शासन-प्रशासन और पेयजल एजेंसियां भली-भांति जानती हैं कि गर्मी के सीजन में मांग की तुलना में पानी की उपलब्धता बेहद कम हो जाती है। नदी, तालाबों का सतही जलस्तर कम हो जाता है। भूमिगत जलस्तर भी गिर जाता है। सिर्फ हल्द्वानी की ही बात करें तो इस बार जीवनदायिनी गौला का जलस्तर गिरकर दशक भर पुराना रिकॉर्ड तोड़ चुका है। इससे साफ है कि गर्मियों में पानी के लाले पड़ने वाले हैं। लोगों को अपनी प्यास बुझाने और दैनिक क्रियाकलापों के लिए जरुरत भर पानी नहीं मिलने वाला है।
इन हालातों के बीच यक्ष प्रश्न है कि रोपे गए पौधों की निरतंर सिंचाई के लिए पुलिस पानी कहां से जुटाएगी। पेयजल की आशंकित किल्लत के बीच पानी जुटा भी ले तो यह किसी इंसान के हलक तर करने का हक छीनने जैसा होगा। ऐसे में डीजीपी का पौधरोपण का फरमान तुगलकी ही कहा जा सकता है। यहां यह भी गौरतलब है कि वन विभाग समेत विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी एजेंसियां मानसून सीजन में पौधरोपण का अभियान चलाते हैं। भारतीय संस्कृति की मान्यताओं के साथ वैज्ञानिक आधार पर भी मानसून सीजन को पौधरोपण के लिए सर्वथा उपयुक्त माना जाता है। डीजीपी ने यह फरमान जारी कर ट्रोलर्स को आलोचना का मसाला भी दे दिया है। लोग दबी-छुपी जुबान में डीजीपी के फरमान पर चुटकियां ले रहे हैं।
गर्मी के सीजन में पेयजल एजेंसियां सिंचाई पर लगा देती हैं रोक
हल्द्वानी। गर्मी के सीजन में किल्लत को देखते हुए पेयजल एजेंसियां फुलवारियों में सिंचाई पर रोक लगा देती हैं। पेयजल से सिंचाई करते हुए पकड़े जाने पर कार्रवाई करती हैं। नियमानुसार पेयजल से सिंचाई नहीं की जा सकती। अब ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस महकमा रोपे गए पौधों की सिंचाई के लिए पानी कहां से लाएगा।
फरमान के इस संबंध में पक्ष जानने के लिए डीजीपी अशोक कुमार के सीयूजी नंबर पर फोन किया गया। लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसी तरह नैनीताल एसएसपी प्रीतिप्रियदर्शिनी से भी संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने भी कॉल रिसीव नहीं की।
