पानी की पीर: करायल जौलासाल में छह माह से पानी को तरस रहे ग्रामीण

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हल्द्वानी, अमृत विचार। तेजी से फैल रही हल्द्वानी में सर्दी के मौसम से ही पानी का संकट विकट होने लगा है। शहर से सटे गांव करायल जौलासाल में अक्टूबर तकरीबन छह महीनों से पेयजल आपूर्ति ठप है। शर्मनाक तो यह है कि जल संस्थान नलों में पानी तो नहीं पहुंचा सका है लेकिन घरों में …

हल्द्वानी, अमृत विचार। तेजी से फैल रही हल्द्वानी में सर्दी के मौसम से ही पानी का संकट विकट होने लगा है। शहर से सटे गांव करायल जौलासाल में अक्टूबर तकरीबन छह महीनों से पेयजल आपूर्ति ठप है। शर्मनाक तो यह है कि जल संस्थान नलों में पानी तो नहीं पहुंचा सका है लेकिन घरों में हर माह पानी के बिल भेज रहा है।

करायल जौलासाल गांव में 40 से ज्यादा परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में चार किमी दूर ऊंचापुल के पास से पानी की आपूर्ति की जाती है। गांव से पहले ही पेयजल लाइन के वॉल्व को बंद कर दिया जाता है। इससे यहां अक्टूबर से पेयजल आपूर्ति नहीं हुई है। ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने समेत अन्य दैनिक कामों नहाने, कपड़े धोने, खाना पकाने वगैरह के लिए निजी टैंकर खरीदने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को एक टैंकर का दाम 450 से 550 रुपये चुकाने होते हैं।

इस तरह महीने में चार-पांच टैंकरों के ढाई से तीन हजार रुपये बेवजह भुगतान करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल आपूर्ति के लिए जल संस्थान के जेई से ईई तक शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब होली का त्योहार सिर पर है और पानी की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में ग्रामीणो ने जल संस्थान ईई संजय श्रीवास्तव से शिकायत कर पानी आपूर्ति की मांग की है। गुस्साए ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि गांव में पेयजल आपूर्ति नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

दीपिका पलानी- पेयजल आपूर्ति के लिए कई दफा जलसंस्थान के अधिकारियों से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर बार जल्द आपूर्ति का आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है। मजबूर होकर पानी खरीद कर प्यास बुझानी पड़ रही  है।

रोहित पलानी- शहर से आ रही पेयजल लाइन में इस गांव को लेकर जलसंस्थान के अवर अभियंताओं में विवाद भी चल रहा है। दोनों जेई एक दूसरे की पेयजल लाइनों से यहां पानी आपूर्ति की बात कहकर मामला टाल देते हैं। इस विवाद से अभी तक गांव में पानी आपूर्ति नहीं हुई है।

देवेंद्र पलानी-जल संस्थान पिछले छह माह से गांव में पानी की आपूर्ति तो नहीं कर पाया है लेकिन हर माह बिल नियम से भेजता है। जल संस्थान अधिकारियों को शर्म आनी चाहिए कि जनता का गला नहीं तर कर पा रहे हैं लेकिन बिल भेज देते हैं।

रोशन मेहरा-दैनिक जरुरतें पूरी करने के लिए पानी का निजी टैंकर खरीदना पड़ता है। एक टैंकर में 450 से 500 रुपये का खर्च होता है। इस तरह महीने में चार-पांच टैंकर पानी इस्तेमाल होता है। एक परिवार पर बेवजह दो से ढाई हजार रुपये का खर्च झेलना पड़ता है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता संजय श्रीवास्तव ने बताया कि गांव के प्रधान हरीश बिष्ट ही पानी की आपूर्ति का विरोध कर रहे हैं। जेई को निर्देश दिए हैं कि ग्राम प्रधान से बातचीत कर समस्या का समाधान करें, जल्द ही ग्रामीणों को पानी आपूर्ति की जाएगी।

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