हल्द्वानी: जेल के कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी गंभीर लहर को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सात मई 2021 को पारित आदेशों के अनुक्रम में उत्तराखंड की हाई पावर कमेटी ने राज्य के कारागारों में निरुद्ध बंदियों को पुनः 90 दिन के पैरोल पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश विशेषतः उन बंदियों …
हल्द्वानी, अमृत विचार। कोरोना की दूसरी गंभीर लहर को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय के सात मई 2021 को पारित आदेशों के अनुक्रम में उत्तराखंड की हाई पावर कमेटी ने राज्य के कारागारों में निरुद्ध बंदियों को पुनः 90 दिन के पैरोल पर रिहा करने के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश विशेषतः उन बंदियों पर लागू होंगे, जिन्हें पिछले वर्ष महामारी के दौरान भी पेरोल पर रिहा किया गया था।
उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य-सचिव एवं जिला जज आरके खुल्बे ने बताया कि कारागारों में निरुद्ध बंदियों में कोरोना महामारी के संक्रमण के खतरे को देखते हुए लिया गया है। उत्तराखण्ड में पूर्व गठित व वर्तमान में अस्तित्व में मौजूद हाई पावर कमेटी के पदेन अध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी तथा इसके पदेन सदस्य के रूप में उत्तराखंड राज्य के प्रमुख सचिव, गृह-कारागार एवं उत्तराखंड राज्य के महानिदेशक कारागार हैं।
कमेटी ने राज्य के सभी डीएम एवं एसएसपी को भी निर्देश दिए हैं कि वह इस आदेश के अनुक्रम में पेरोल पर रिहा होने वाले बंदियों को कारागार से उनके संबंधित स्थानों तक कोविड गाइडलाइन के नियमों एवं दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए पहुंचाने के लिए उचित कार्यवाही करें। इससे पहले महानिदेशक, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सहित राज्य के सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारी पैरोल पर रिहा होने वाले बंदियों की रिहाई से पूर्व कोविड-19 नियमों के अनुरूप आवश्यक चिकित्सीय जांच, विशेषकर कोरोना जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष राज्य की 11 जेलों से 891 बंदी पैरोल पर रिहा हुए थे।
गौरव
