बरेली: क्या कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर ढाएगी कहर?, जानिए इससे जुड़ीं अहम जानकारियां
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की बेकाबू हो चुकी दूसरी लहर के बीच तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों को अधिक प्रभावित करेगी। इस खबर ने लोगों को चिंता में डाल दिया है लेकिन शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा.अतुल अग्रवाल ने …
बरेली, अमृत विचार। कोरोना की बेकाबू हो चुकी दूसरी लहर के बीच तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों को अधिक प्रभावित करेगी। इस खबर ने लोगों को चिंता में डाल दिया है लेकिन शहर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा.अतुल अग्रवाल ने कई दिनों से चल रही खबरों का खंडन किया है। उनका कहना है कि तीसरी लहर आएगी या बच्चों पर प्रभाव डालेगी यह गणितज्ञीय आंकलन है। गणितज्ञीय आंकलन हर बार सही ही हो, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
सोमवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए उन्होंने तीसरी लहर के आने से पहले होने वाली तैयारियों और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अहम जानकारियां दीं। वीडियो कांफ्रेसिंग में डा.अतुल अग्रवाल ने बताया कि यह सारा कुछ आंकड़ों के आधार पर गणितज्ञ आधार पर निकाला गया है। संक्रमण में पूरा का पूरा परिवार संक्रमित हो रहा है। जांच एक या दो लोग ही करवा रहे हैं। ऐसे में कुल संक्रमित की संख्या वर्तमान संख्या से कई गुना अधिक हो सकती है। इसलिए यह गणितज्ञीय मॉडल सही होगा या नहीं, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए सीरो सर्वे करना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
बताया कि 1920 में आई महामारी में चार से पांच लहर आई थीं, जबकि 1966 से वर्तमान लहर 20 गुना अधिक है। डा. अतुल ने बताया कि बच्चे के वजन के हिसाब से उसे उस वेंटिलेटर पर रखा जाता है। कुछ वेंटिलेटर मॉडीफाइड हो जाते हैं, लेकिन ऐसे वेंटिलेटरों की संख्या बहुत कम है। ऐसी स्थिति में प्रशासन को डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों में कुछ बेड बच्चों के लिए आरक्षित करने होंगे।

साढ़े तीन साल तक अधिक प्रभावी रहता है आरएमए वायरस
डा. अतुल बताते हैं कि हर नया आरएमए वायरस साढ़े तीन साल तक प्रभावी रहता है। कुछ साल पहले डेंगू आया था, जिसका पहले साल अधिक प्रभाव रहा था, फिर दूसरी साल भी यही स्थिति रही, इसके बाद यह वायरस धीरे-धीरे स्वरूपों को बदलता हुआ क्षीण हो गया।
बच्चों को सर्दी जुकाम दे रहा क्रॉस प्रोटेक्शन, टीका जरूरी
बताया कि बच्चों को घर में फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम खाने के बाद सर्दी, जुकाम, नाक बहना, जिसको आप सर्दी कहते हैं, वह दरअसल राइनो वायरस की समस्या होती है, लेकिन यह सब बच्चों को क्रॉस प्रोटेक्शन दे रहा हैं। कहा कि अगर बच्चे ने एमएमआर, निमोनिया या बुखार का टीका लगवा रखा है तो किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं है। अगर बच्चे को एमएमआर का टीका लगवाए हुए 3 वर्ष से अधिक समय हो गया है तो ऐसे में वह दोबारा यह टीका लगवा सकते हैं।
बच्चे हुए प्रभावित तो न ही चिकित्सक न ही वेंटिलेटर
बाल रोग विशेषज्ञ डा. अतुल ने बताया कि पूरे प्रदेश में बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या काफी कम है। बच्चे को अकेले भर्ती करने पर कोई परिजन तैयार नहीं होगा। ऐसे में बच्चे के साथ उसकी मां या पिता साथ होंगे। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए फुल बेड का इंतजाम करना जरूरी है।
