बरेली: हालमार्क लागू हुआ तो गलाने पड़ेंगे करोड़ों के जेवरात

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। सोने के गहनों की खरीदारी में धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न रहे, इसको लेकर 15 जून से केंद्र सरकार भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की तैयारी में है। इससे सराफा कारोबारियों की नींद उड़ गई हैं। उनका कहना है हॉलमार्क कानून यदि लागू हुआ तो भारी मात्रा में सोने के …

बरेली, अमृत विचार। सोने के गहनों की खरीदारी में धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न रहे, इसको लेकर 15 जून से केंद्र सरकार भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्किंग अनिवार्य करने की तैयारी में है। इससे सराफा कारोबारियों की नींद उड़ गई हैं। उनका कहना है हॉलमार्क कानून यदि लागू हुआ तो भारी मात्रा में सोने के जेवर गलाने पड़ सकते हैं। कोरोना की दूसरी लहर में वे सिर्फ यही चाहते हैं सरकार अभी हॉलमार्किंग की अनिवार्यता को छह महीने और आगे बढ़ा दें। कुछेक कारोबारी ऐसी भी है जिनके पास हॉलमार्क संबंधी लाइसेंस है और वह चाहते हैं 15 जून से सरकार से इसे लागू कर दे।

शहर में करीब एक हजार सराफा कारोबारी हैं। इनमें चंद लोगों के पास ही हॉलमार्क संबंधी लाइसेंस है। ऐसे में बिना हॉलमार्क के आभूषणों को इतनी जल्दी खत्म करना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में इन्हें गलाने के अलावा कोई और विकल्प बचेगा नहीं। इधर, बताया जाता है सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क अनिवार्य करने की व्यवस्था एक जनवरी 2021 से प्रस्तावित थी लेकिन सरकार ने इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया था। फिर एक जून से प्रभावी करने की तैयारी थी, लेकिन सरकार ने सोमवार को 15 जून तक के लिए व्यवस्था बढ़ा दी है। अब 15 जून से इसे लागू करने की तैयारी से छोटे सराफा कारोबारियों के समाने सबसे अधिक समस्या है।

शहर में आलगगिरीगंज, कुतुबखाना, बड़ा बाजार, सिविल लाइंस, राजेंद्र नगर में थोक और फुटकर आभूषणों का बहुत बड़ा बाजार है। कई नामी कंपनियों के शोरूम भी हैं। इन कारोबारियों के पास सोने के गहनों का बंपर स्टॉक है। कारोबारियों के मुताबिक बिना हॉलमार्क आभूषणों के स्टॉक हटाने का समय बहुत कम है। मौजूदा समय में लाकडाउन भी चल रहा है। सराफा बाजार बंद है। लिहाजा एक बार फिर समय बढ़ाने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर उनको सोने में लगे तमाम रत्न अलग करने पड़ेंगे। इसके अलावा मेकिंग चार्ज आदि मिलाकर बीस फीसदी तक नुकसान हो सकता है।

हॉलमार्किंग क्यों है जरूरी
बता दें कि हॉलमार्किंग वह तरीका है जिससे सोने की शुद्धता प्रमाणित होती है। भारतीय स्टैंडर्ड को गोल्ड में मार्क करने को हॉलमार्किंग कहा जाता है। कैरेट के जरिए भारतीय स्टैंडर्ड को सोने के ऊपर अंकित किया जाता है। बगैर हॉलमार्किंग के गोल्ड ज्वैलरी खरीदने पर अगर उसे बेचने जा रहे हैं तो आपको कम भाव मिल सकता है। दरअसल, आपके पास सोने की शुद्धता का कोई भी सर्टिफिकेट नहीं है इसलिए हो सकता है जब आप 22 कैरेट की ज्वैलरी को बेचने जा रहे हों तो आपकी ज्वैलरी 18 कैरेट की निकल आए। ऐसे में आपको मोटा नुकसान हो सकता है। इसी तरह की तमाम दिक्कतों को देखते हुए हॉलमार्किंग कराना बेहद जरूरी माना गया है।

सराफा कर रहे 20 कैरेट के हॉलमार्क की मांग
मौजूदा समय में सरकार ने 14, 18 और 22 कैरेट सोने पर हॉलमार्क की व्यवस्था कर रखी है। शहर में 20 कैरेट वाली ज्वैलरी की सबसे अधिक मांग है। ऐसे में सराफा इस कैरेट पर भी हॉलमार्क की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। जिन सराफा के पास इस कैरेट के आभूषण होंगे, उन्हें हटाने की जरूरत नहीं होगी

खरीदार कैसे पहचानेंगे हॉलमार्क
हॉलमार्क वाली ज्वैलरी पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) की मुहर लगी रहती है। इसके अलावा हॉलमार्क के वर्ष का भी जिक्र होता है। सोने की शुद्धता की कैरेट बताने के लिए सोने पर के लिखा होता है। 22के का मतलब 91.6 फीसदी प्योरिटी यानी 916 गोल्ड, 24 कैरेट यानी 99.9 फीसदी शुद्धता, 23 कैरेट में 95.8 फीसदी शुद्धता, 22 कैरेट यानी 91.6 फीसदी शुद्धता, 21 कैरेट यानी 87.5 फीसदी की शुद्धता, 18 कैरेट यानी 75 फीसदी की शुद्धता, 17 कैरेट यानी 70.8 फीसदी की शुद्धता और 14 कैरेट यानी 58.5 फीसदी की शुद्धता होती है।

कोरोना के कारण पिछले दो साल से अक्षय तृतीया का कारोबार हाथ से जा चुका है। लोग अभी भी अपने विश्वसनीय या परिचित सराफा कारोबारियों से ही आभूषण खरीदते हैं। हॉलमार्क लागू होने पर बड़े पैमाने पर बिना हॉलमार्क वाले सोने के गहनों को गलाना होगा। इसमें करीब 100 करोड़ का नुकसान हो जाएगा। -संजीव औतार अग्रवाल, मंत्री, बरेली सराफ एसोसिएशन

हॉलमार्क लागू करने में सरकार को बहुत अधिक जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। कोरोना के चलते सराफा बाजार बंद चल रहा है। 15 जून से हॉलमार्क कानून लागू होता है तो स्टाक क्लीयरेंस करने में ही कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान होगा। बड़ी मात्रा में सोने के जेवरों को गलाना पड़ेगा। -सचिन वर्मा, सराफा कारोबारी

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