हल्द्वानी: अब सबूत की कमी से नहीं बच पाएंगे साइबर अपराधी
गौरव पांडे, अमृत विचार। सबूतों में कमी के चलते अक्सर कानूनी शिकंज से बच निकलने वाले साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं। इन अपराधियों से निपटने के लिए उत्तराखंड पुलिस की स्पेशन टॉस्क फोर्स ने एसओपी (मानक प्रचालन कार्यविधि) जारी कर दी है। अब उम्मीद है कि राज्य में दिनोंदिन पैर पसार रहे साइबर अपराधियों …
गौरव पांडे, अमृत विचार। सबूतों में कमी के चलते अक्सर कानूनी शिकंज से बच निकलने वाले साइबर अपराधियों की अब खैर नहीं। इन अपराधियों से निपटने के लिए उत्तराखंड पुलिस की स्पेशन टॉस्क फोर्स ने एसओपी (मानक प्रचालन कार्यविधि) जारी कर दी है। अब उम्मीद है कि राज्य में दिनोंदिन पैर पसार रहे साइबर अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसेगा और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।
हमारा समाज काफी तेजी से डिजिटलीकरण की ओर बढ़ रहा है। बड़ी आबादी डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही समाज में नए-नए तौर-तरीकों से साइबर अपराध की भी बाढ़ आ गई है। रोजाना अनगिनत लोग साइबर अपराधियों का निशाना बन रहे हैं। राज्य में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध से पुलिस महकमे में भी चिंता बढ़ गई है।
यही कारण है कि राज्य में साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए देहरादून और रुद्रपुर में विशेष थाने खोले जा चुके हैं। इसके इतर, अक्सर देखा जा रहा है कि साइबर अपराधों की पुलिस जांच में गुणत्ता की कमी रहती है। जांच अधिकारियों में अनुभव की कमी और व्यवहारिक रूप से जानकारी कम होने के कारण तकनीकी और दस्तावेजी सबूत नहीं मिल पाते।
इससे अदालतों में विचारण के दौरान साइबर अपराधियों को सीधा लाभ मिलता है। साथ ही सजा के प्रतिशत में भी कमी आती है। साथ ही साइबर अपराध की जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने में मानक प्रचालन कार्यविधि और प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों की कमी रहती है। इससे 99 फीसदी से अधिक पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाता और साइबर अपराधी बेखौफ होकर लोगों को निशाना बनाते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। एसटीएफ ने साइबर अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसने के लिए एसओपी जारी कर दी है। इसके साथ ही राज्य के हर थाने में जांच अधिकारियों को एसओपी का प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की है।
एसओपी से साइबर अपराध को लेकर बढ़ेगी समझ
हल्द्वानी। एसओपी से पुलिस के जांच अधिकारियों की साइबर अपराध को लेकर समझ बढ़ेगी। एसओपी में साइबर अपराध के विभिन्न तौर-तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। इसके साथ ही अपराध होने पर क्या-क्या कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। मसलन पुलिस जांच की शुरूआत कहां से होगी। जांच में कौन-कौन से सबूत जुटाने पड़ेंगे। संबंधित नोडल एजेंसियों से संपर्क आदि ब्योरा दिया गया है। पुलिस एसओपी के अनुसार जांच करती है तो साइबर अपराधियों को पकड़ना पहले से आसान हो जाएगा। इससे साइबर अपराधी हतोत्साहित होंगे और लगातार घट रहे अपराध पर नियत्रंण होगा।
दिनोंदिन बढ़ता साइबर अपराध पुलिस के लिए लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के बाद दूसरी सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। साइबर अपराधियों से निपटने के लिए राज्य में एसओपी जारी कर दी गई है। इससे जांच अधिकारियों को सबूत जुटाने और घटनाओं के खुलासे में मदद मिलेगी। साथ ही पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिल सकेगा।
– वी मुरुगेशन, आईजी, एसटीएफ
