अल्मोड़ा: पुरातत्व विभाग ने आधा संवार कर छोड़ दिया देवभूमि का ‘नौ देवालय’
अमृत विचार, अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड में पौराणिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग कितना गंभीर है, इसकी बानगी धौलादेवी विकास खंड के नौ देवालय बानठौक को देखने से पता चल जाती है। इस पौराणिक धरोहर को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यहां करीब तीन साल पहले मरम्मत का कार्य शुरू किया गया …
अमृत विचार, अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड में पौराणिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग कितना गंभीर है, इसकी बानगी धौलादेवी विकास खंड के नौ देवालय बानठौक को देखने से पता चल जाती है। इस पौराणिक धरोहर को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यहां करीब तीन साल पहले मरम्मत का कार्य शुरू किया गया था। लेकिन विभाग ने आधा-अधूरा कार्य कर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली है।
धौलादेवी के बानठौक में नौ मंदिर समूहों का देवालय स्थित है। जिसे देखने के लिए यहां देश विदेश से सैलानी आते हैं। लेकिन देखरेख के अभाव में अब यह मंदिर समूह खस्ता हालत में पहुंच गया है। बानठौक के प्रधान हरीश गैलाकोटी ने बताया कि मंदिर की देखरेख के लिए विभाग ने यहां एक कर्मचारी तैनात किया है। लेकिन वह अक्सर यहां से गायब रहता है। जिससे मंदिर के चारों तरफ झाडिय़ां उग आई है और सुरक्षा दीवार भी ध्वस्त हो गई है।
लोगों की लंबी मांग के बाद वर्ष 2017-18 में यहां मंदिर की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया था। लेकिन कार्यदायी संस्था आधा अधूरा कार्य छोड़कर यहां से नदारद है। गैलाकोटी ने बताया कि कई बार विभाग के अधिकारियों से इस पौराणिक मंदिर के संरक्षण की मांग की गई है, लेकिन अधिकारी ग्रामीणों की मांग को लगातार अनसुना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस देवालय पर ग्रामीणों की अगाध आस्था है और ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टि से यह मंदिर समूह काफी महत्वपूर्ण भी है। लेकिन विभाग की अनदेखी के कारण यह पौराणिक धरोहर लगातार जीर्ण शीर्ण होती जा रही है। गैलाकोटी ने कहा है कि अगर शीघ्र इस देवालय की सुध नहीं ली गई तो ग्रामीण विभाग के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।
