हल्द्वानी: बेस और महिला अस्पताल को ओपीडी कम होने से डेढ़ करोड़ का हुआ घाटा

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नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। कोरोनाकाल में सोबन सिंह जीना अस्पताल और राजकीय महिला अस्पताल दोनों ही जगह ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हो गई है। इस वजह से ओपीडी के पर्चों से होने वाली आय भी प्रभावित हुई है। ओपीडी से होने वाली आय से अस्पताल प्रशासन दवाओं और उपकरण की खरीद के अलावा …

नरेन्द्र देव सिंह, हल्द्वानी। कोरोनाकाल में सोबन सिंह जीना अस्पताल और राजकीय महिला अस्पताल दोनों ही जगह ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हो गई है। इस वजह से ओपीडी के पर्चों से होने वाली आय भी प्रभावित हुई है। ओपीडी से होने वाली आय से अस्पताल प्रशासन दवाओं और उपकरण की खरीद के अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय भी दिए जाते थे।

इस समय सरकारी अस्पताल में ओपीडी के पर्चे का शुल्क 28 रुपया चल रहा है। बेस अस्पताल में कोरोनाकाल से पहले प्रतिदिन 1500 तक मरीज आते थे। ओपीडी की वजह से एक दिन में 35 से 40 हजार तक की आय अस्पताल को होती थी। इसके बाद पहले लॉकडाउन के बाद से मरीजों की संख्या में काफी गिरावट आई और एक दिन में तीन सौ से चार सौ मरीज आने लगे और ओपीडी में प्रतिदिन होने वाली आय भी कम हो गई। इधर महिला अस्पताल में कोरोनाकाल से पहले प्रतिदिन चार सौ तक मरीज आते थे। बाद में इन मरीजों की संख्या घटकर 100 पर आ गई। एक अनुमान के तहत कोरोनाकाल में अभी तक बेस अस्पताल को ओपीडी में कम हो रहे पर्चे की वजह से सवा करोड़ तो वहीं महिला अस्पताल में 25 लाख तक का घाटा हुआ है। जिस वजह से अस्पतालों को अतिरिक्त खर्चों के लिए शासन की ओर मुंह ताकना पड़ रहा है।

अस्पताल के लिए खर्च होता है रुपया
ओपीडी से होने वाली आय को अस्पताल के लिए खर्च किया जाता है। इनमें से आधी रकम को सरकार के पास भेजा जाता है और बाकी की रकम से अस्पताल की जरूरत पूरी की जातीं हैं। इसके लिए डीएम को डिमांड बनाकर भेजी जाती है और वहां से स्वीकृति आने के बाद उस रकम को खर्च किया जाता है। इससे अस्पताल के लिए दवाएं, उपकरण और आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन दिए जाते हैं। इस समय रुपए की कमी होने की वजह से यह रुपया भी शासन से मंगाना पड़ रहा है। पहले छोटे खर्चों के लिए बार-बार शासन से फाइल नहीं भेजनी पड़ती थी। अस्पताल अपनी ही आय उन खर्चों को पूरा कर लेता था। इधर दोनों ही अस्पतालों की घटी आय की वजह से नए आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति भी बंद कर दी गई है।

कोरोनाकाल में मरीज कम हो गए हैं। ओपीडी भी कम हो गई है। ओपीडी में पहले की तरह मरीज नहीं आ रहे हैं।- डा. हरीश लाल, पीएमएस, सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल

कोरोना के समय में लोग जरूरी होने पर ही अस्पताल आ रहे हैं। बीच में मरीज बढ़े थे, बाद में फिर मरीज कम हो गए।-डा. उषा जंगपांगी, सीएमएस, राजकीय महिला अस्पताल

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