हल्द्वानी: यहां पल-पल मौत के साये में जी रहीं सैंकड़ों जिंदगी…
हल्द्वानी, अमृत विचार। बरसात क्या आई खतरे का अंदेशा लाई है। मानसूनी सीजन में लोगों को पल-पल मौत के डर के साथ रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। न जाने कब ऊपर से मलबा एक पल में ही सब तबाह कर दे। ये हाल किसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र का नहीं बल्कि दमुवाढुंगा के जवाहर …
हल्द्वानी, अमृत विचार। बरसात क्या आई खतरे का अंदेशा लाई है। मानसूनी सीजन में लोगों को पल-पल मौत के डर के साथ रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। न जाने कब ऊपर से मलबा एक पल में ही सब तबाह कर दे। ये हाल किसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र का नहीं बल्कि दमुवाढुंगा के जवाहर ज्योति बेड़ी खत्त्ता क्षेत्र का है।

300 से ज्यादा आबादी के जवाहर ज्योति बेड़ी खत्त्ता क्षेत्र में सीमेंटेंड रोड के नीचे से भारी मात्रा में मिट्टी का कटान हो चुका है। कॉलोनी को जाने वाली सीमेंटेड रोड सिर्फ दो चार सरिए के सहारे ही टिकी हुई हैं। यहां की हालत देख लोगों ने इस रास्ते पर वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। आलम यह है कि सड़क के नीचे व आसपास के लोगों की जान को खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब दस साल पहले इस रोड का निर्माण कराया गया था। यहां रह रहे लगभग 30 परिवार सीधे तौर पर इस सड़क से जुड़े हुए हैं। ऐसे में हालात खराब होने से लोगों के लिए संकट बना हुआ है। सड़क से मलबा अब लोगों के घरों में घुसने लगा है। जो कभी भी बरसात के समय किसी बड़े खतरे का सबब बन सकता है।
ये है स्थानीय लोगों का दर्द
10 वर्ष पूर्व यह कच्चा रास्ता हुआ करता था। यह कटान पिछले कई दिनों से जारी है, कई बार बड़े अधिकारियों से बात कर तत्काल समाधान के लिए कहा गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
-मनोज लोहनी, निवासी
सड़क से ठीक नीचे मेरा और मेरे भाई का घर है। जो कभी भी मलबे की चपेट में आने से ध्वस्त हो सकता है और इससे किसी प्रकार की जनहानि भी हो सकती है। बरसात के दिनों में रात-रात भर जाग कर पहरा देना पड़ रहा है। बरसात होने पर घर छोड़ बाहर जाने की मजबूर होती है। र
-राजेंद्र प्रसाद, निवासी
