हल्द्वानी: परंपराओं ने दबाई डाक विभाग की अस्थि विसर्जन योजना

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बबीता पटवाल, हल्द्वानी। डाक विभाग की अस्थि विसर्जन योजना को लेकर किसी का भी रूझान देखने को नहीं मिला है। योजना शुरू हुए 15 दिन का समय बीत गया लेकिन किसी ने भी योजना का लाभ नहीं लिया है। जानकारों का कहना है कि विभाग की इस योजना में हिंदू धर्म की पंरपरा आड़े रही …

बबीता पटवाल, हल्द्वानी। डाक विभाग की अस्थि विसर्जन योजना को लेकर किसी का भी रूझान देखने को नहीं मिला है। योजना शुरू हुए 15 दिन का समय बीत गया लेकिन किसी ने भी योजना का लाभ नहीं लिया है। जानकारों का कहना है कि विभाग की इस योजना में हिंदू धर्म की पंरपरा आड़े रही है क्योंकि धर्मानुसार अस्थि विसर्जन के लिए उनके परिजन ही जाते हैं।

डाक विभाग की ओर से अस्थि विसर्जन योजना शुरू की गई। योजना के तहत लोगों को अपने परिजन की अस्थियों को पार्सल के रूप में डाक विभाग में लाना होगा। इसके बाद विभाग पार्सल के वजन के हिसाब इस पर शुल्क लगाएगा। इसके बाद अस्थि को पार्सल करके हरिद्वार भेजा जाएगा और हरिद्वार का डाक विभाग उन अस्थियों का विसर्जन गंगा नदी में कर देगा। इसके तहत लोगों को अब अस्थि विसर्जन के लिए हरिद्वार तक जाने की जरूरत नहीं है। इस योजना को शुरू हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए है लेकिन इस योजना में किसी ने भी अपनी रूचि नहीं दिखाई है।

हल्द्वानी के पोस्टमास्टर वाईके बमेठा ने बताया कि योजना के लागू होने के बाद से अभी तक डाक विभाग में कोई भी व्यक्ति अपने परिजन की अस्थि लेकर नहीं आया है। इधर, धर्म के जानकारों से डाक विभाग की इस योजना के अभी तक फेल रहने का कारण पूछा तो उन्होंने बताय कि हिंदू धर्म की पंरपराओं में इस तरह अस्थि विसर्जन करने का कोई विधान नहीं है। धर्म विशेषज्ञों के अनुसार विधान यह है कि जब अस्थियों को मृतक के परिजन स्वयं हरिद्वार लेकर जाएं और वहां पूजा पाठ के साथ विधिवत विसर्जन करें।

इस तरह से डाक विभाग द्वारा अस्थि का विसर्जन करे जाने की पंरपरा नहीं है। अगर कोई व्यक्ति अनाथ या अक्षम है तब तो इसका प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अगर कुमाऊंनी परंपराओं की बात करें तो यहां अस्थि विसर्जन अलग से करने की परंपरा नहीं है। यहां नदी में शवदाह के समय ही अस्थि भी बहा दी जातीं हैं।

-डाक विभाग की अस्थि विसर्जन योजना का लाभ अभी तक किसी ने भी नहीं लिया है। विभाग से जब भी कोई संपर्क करेगा उसको योजना का लाभ दिया जाएगा।- वाईके बमेठा, पोस्टमास्टर, हल्द्वानी

-सनातनी परंपराओं के अनुसार डाक विभाग की अस्थि विसर्जन योजना धर्मसंगत नहीं है। साथ ही कुमाऊं में शव के दाह संस्कार के समय ही अस्थि भी बहा दी जाती हैं।- डॉ. नवीन चंद्र जोशी, ज्योतिषाचार्य

-जिन मृतकों का कोई वारिस नहीं होता है या फिर जो अस्थि कोई ले नहीं जा रहा है, उनका विसर्जन डाक विभाग की योजना के तहत हो सकता है। बाकी नियम के तहत ऐसा नहीं किया जाता। -गोपालदत्त भट्ट, ज्योतिषि व धर्म विशेषज्ञ

-परंपरा के अनुसार परिजनों का अस्थि विसर्जन के समय मौजूद होना आवश्यक है। यह भी दायित्व है जिसे निभाया जाता है।

– शांता कांडपाल, धर्म विशेषज्ञ

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