हल्द्वानी: सजा काटने के बाद भी आखिर 45 बंदी सजा काटने को मजबूर

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गौरव पांडेय/पवन सिंह कुंवर, हल्द्वानी। आम तौर पर किए अपराध की सजा पूरी करने के बाद जेलों से बंदियों को रिहा कर दिया जाता है। लेकिन हल्द्वानी जेल में 45 बंदी ऐसे भी हैं, जो सजा पूरी करने के बाद भी जेल में कैद काट रहे हैं। इन बंदियों को अभी तक जेल से रिहाई …

गौरव पांडेय/पवन सिंह कुंवर, हल्द्वानी। आम तौर पर किए अपराध की सजा पूरी करने के बाद जेलों से बंदियों को रिहा कर दिया जाता है। लेकिन हल्द्वानी जेल में 45 बंदी ऐसे भी हैं, जो सजा पूरी करने के बाद भी जेल में कैद काट रहे हैं। इन बंदियों को अभी तक जेल से रिहाई नहीं मिल पाई है।

हल्द्वानी जेल में अलग-अलग अपराधों में बंद 45 सजायाफ्ता कैदी ऐसे हैं, जो सजा पूरी करने के बाद भी जेल की सलाखों के पीछे कैद हैं। किसी को सजा पूरी किए तीन महीना बीत चुका है। कोई दो महीनों से जेल से छूटने का इंतजार कर रहा है। तो किसी को सजा पूरी किए सप्ताह भर हो चुका है। एक-एक दिन गुजरने के साथ ही इनका जेल से छूटने का इंतजार भी बढ़ता ही जा रहा है। जेल में ऐसे 10 कैदी नैनीताल जिला जबकि 35 कैदी ऊधमसिंह नगर जिले से हैं। सजा पूरी होने के बाद भी इन कैदियों को जेल में एक-एक दिन बिताना भारी लग रहा है। ऐसे बंदी जेल प्रशासन से अपनी रिहाई को लेकर रोजाना पूछ रहे हैं। रिहाई के इंतजार में इन बंदियों के बीच मायूसी भी बढ़ती जा रही है।

जमानती न मिल पाने से आ रही रिहाई की अड़चन
हल्द्वानी। जेल में बंद सजा पूरी करने वाले कैदियों के अभी भी न छूटने के कई कारण है। सबसे बड़ा कारण है कि कैदियों को स्थानीय जमानती के न मिलने के चलते रिहाई में अड़चन आ रही है। दरअसल ज्यादातर कैदियों को कोर्ट में पेश करने के लिए स्थानीय जमानती नहीं मिल पा रहे हैं। इसके अलावा कई कैदियों के परिजन अभी तक उनकी रिहाई करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। कुछ कैदियों के परिजनों ने तो उनसे मुंह मोड़ लिया है। सजा पूरी होने का पता चलने के बाद भी जेल से रिहाई कराने का प्रयास तक नहीं किया है।

जेल प्रशासन ने कोर्ट को बताई वस्तुस्थिति, व्यक्तिगत जमानत का विकल्प
हल्द्वानी। जेल प्रशासन ने जिला अदालत और विधिक सेवा प्राधिकरण को इस वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। जेल प्रशासन ने इस संबंध में अदालत में रिपोर्ट भेजी है। इसमें बताया गया है कि सजा पूरी करने के बाद भी रिहाई न होने से 45 कैदियों को अब तक नहीं छोड़ा जा सका है। दूसरी ओर जमानती न मिलने और परिजनों की उपेक्षा के बीच कैदियों को राहत देने के लिए व्यक्तिगत जमानत देने का भी विकल्प हैं। कोर्ट चाहे तो ऐसे कैदियों को व्यक्तिगत जमानत पर रिहा करने का आदेश दे सकती है।

सजा पूरी होने के बाद भी 45 जेल में बंद हैं। कानूनी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण इनकी रिहाई नहीं हो पाई है। जेल प्रशासन कैदियों के परिजनों को पहले ही सजा पूरी होने की सूचना दे चुका है।
सतीश सुखीजा, जेल अधीक्षक, हल्द्वानी उप कारागार

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