उत्तराखंड: आपदा के बाद पहाड़ में रुला रहीं राशन की कीमतें

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हल्द्वानी, अमृत विचार। दो दिन लगातार हुई बरसात के बाद आई आपदा से अभी राहत भी नहीं मिली कि अब लोगों को राशन की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ेगा। यही नहीं बिजली उपकरण से लेकर अन्य जरूरी सामान भी महंगाई में आसमान छू सकते हैं। ट्रकों का आवागमन ठप होने से यह समस्या पहाड़ी …

हल्द्वानी, अमृत विचार। दो दिन लगातार हुई बरसात के बाद आई आपदा से अभी राहत भी नहीं मिली कि अब लोगों को राशन की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ेगा। यही नहीं बिजली उपकरण से लेकर अन्य जरूरी सामान भी महंगाई में आसमान छू सकते हैं। ट्रकों का आवागमन ठप होने से यह समस्या पहाड़ी क्षेत्रों के रहने वालों के लिए मुसीबत बन सकती है।

दरअसल कुमाऊं द्वार हल्द्वानी से अल्मोड़ा, बागेश्वर, रानीखेत, पिथौरागढ़ जाने वाले रास्ते बंद चल रहे हैं। सड़कों में आई दरारें व अन्य खतरों के चलते भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध चल रहा है। ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष इंद्र कुमार भुटियानी के अनुसार इन इलाकों में प्रतिदिन शहर के करीब 80 ट्रांसपोर्टरों के तीन सौ की संख्या तक ट्रकों का आवागमन रहता है। राशन, बिजली उपकरण, निर्माण व सेनेटरी संबंधित सामान, सब्जी, कपड़ा सहित तमाम जरूरी सामान पहुंचाया जाता है।

आपदा के बाद से इन सामानों की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है। भुटियानी के अनुसार त्योहारों के चलते गुजरात, यूपी, एमपी, महाराष्ट्र सहित कई प्रदेशों से काफी मात्रा में माल ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा है। लेकिन उसकी सप्लाई न होने से उन्हें गोदाम में इकट्ठा किया जा रहा है। अल्मोड़ा के रास्ते ज्यादा क्षतिग्रस्त है, इसलिए वहां का रास्ता खुलने में लंबा वक्त भी लग सकता है। प्रांतीय व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिला महामंत्री हर्ष वर्धन पांडे के अनुसार यदि सप्लाई इसी तरह ठप रहती है तो राशन सहित सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

गोदामों को लेकर गहराया संकट
ट्रांसपोर्टरों के पास अब गोदामों को लेकर भी संकट गहराने लगा है। अध्यक्ष इंद्र कुमार भुटियानी ने बताया कि 80 के करीब ट्रांसपोर्टर हैं। देश के कई प्रदेशों से लगातार ट्रकों के माध्यम से हल्द्वानी माल पहुंच रहा है। लेकिन पहाड़ों में सप्लाई न होने से उसे गोदाम में स्टोर करना पड़ रहा है। पांच दिन से भर रहे गोदाम भी अब फुल हो चुके हैं। ट्रांसपोर्टरों के पास अब गोदामों की व्यवस्था को लेकर भी दिक्कतें शुरू हो गई हैं।

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