हल्द्वानी: मैदान में 42.33 प्रतिशत सड़कों पर घसीट रहे 77 प्रतिशत वाहन

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नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार। विकासशील उत्तराखंड में सड़कों के लिहाज से काफी विषमताएं सामने आई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जहां पहले से ही वाहन चलाना अपने आप में दुष्कर कार्य है। वहीं, मैदानी इलाकों में भी सड़कों की विकास दर रुक सी गई है। जो सरकारी आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार राज्य के …

नरेन्द्र देव सिंह, अमृत विचार। विकासशील उत्तराखंड में सड़कों के लिहाज से काफी विषमताएं सामने आई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में जहां पहले से ही वाहन चलाना अपने आप में दुष्कर कार्य है। वहीं, मैदानी इलाकों में भी सड़कों की विकास दर रुक सी गई है।

जो सरकारी आंकड़े सामने आए हैं, उसके अनुसार राज्य के तीन मैदानी जिलों उधमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार में 42.23 प्रतिशत सड़कें हैं तो वाहनों का प्रतिशत 77.68 पर ही ठहरा हुआ है। इसके विपरीत बाकी 10 जिलों में वाहनों का प्रतिशत 22.32 है तो सड़कें 57.67 प्रतिशत हैं। राज्य में इसी विषमता के चलते जहां हादसों में इजाफा हो रहा है तो यह जाम का भी बड़ा कारण बन रहा है।

यह है हकीकत
जनसंख्या और सड़कों की बात करें तो राज्य में कुल 30 लाख वाहन ऑनरोड पंजीकृत हैं। राज्य की करीब 52 प्रतिशत आबादी देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में निवास करती है। जबकि इन जिलों में राज्य में निर्मित सभी विभागों की कुल 47 हजार किमी सड़कों में से 42.23 प्रतिशत ही सड़कें हैं।

57.77 प्रतिशत सड़कें बाकी के 10 जिलों अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चम्पावत, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग में हैं और यहां 48 फीसदी आबादी निवास करती है और इनमें राज्य के 22.32 प्रतिशत वाहन पंजीकृत हैं। मैदानी इलाकों में सड़कें कम होने और अपेक्षाकृत वाहनों की संख्या काफी ज्यादा होने की वजह से यहां जाम और दुर्घटना का बड़ा कारण भी यही माना जाता है। पर्यटन सीजन में तो हालात काफी विकट हो जाते हैं।

प्रतिलाख जनसंख्या पर सड़क के मामले में टिहरी अव्वल
प्रति लाख जनसंख्या में सबसे अधिक सड़कें टिहरी जिले में हैं। यहां हर एक लाख जनसंख्या पर 690 वर्ग किमी सड़कें हैं। इसके बाद अल्मोड़ा में प्रति लाख जनसंख्या पर 616 वर्ग किमी सड़कें हैं। यह राज्य के औसत भी ज्यादा है। राज्य में प्रति लाख आबादी पर 428.58 किमी सड़कों का औसत है।

9511 किमी मोटर मार्ग अब भी कच्चे
राज्य में लोक निर्माण विभाग के अधीन कुल 37319 किमी में 27807 किमी पक्के मोटर मार्ग हैं जबकि 9511.20 किमी सड़कें मोटर मार्ग कच्चे हैं।

सड़कों पर दबाव कम करने के लिए ये करना होगा
सड़कों पर दबाव कम करने के लिए नए फ्लाईओवर और अंडर बाइपास का निर्माण करना होगा। इन शहरों में प्रस्तावित रिंग रोड का निर्माण किया जाना चाहिए। शहर के बाहरी क्षेत्रों में नई चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जाए।

सड़क निर्माण को लेकर सरकार लगातार प्रयासरत है। पिछले पांच सालों में सड़क निर्माण में अभूतपूर्व काम हुआ है। मैदान और पहाड़ सभी जगह जरूरत के हिसाब से सड़कों को बढ़ाया जाएगा। -सतपाल महाराज, लोनिवि मंत्री, उत्तराखंड

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