रुद्रपुर: आरोप सिद्ध न होने पर प्रशांत राही रिहा

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रुद्रपुर, अमृत विचार। राजद्रोह गतिविधियों के आरोप से घिरे प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही समेत चार लोगों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया है। इस दौरान प्रशांत राही ने न्यायालय में अपनी उपस्थिति वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से दी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा …

रुद्रपुर, अमृत विचार। राजद्रोह गतिविधियों के आरोप से घिरे प्रशांत सांगलेकर उर्फ प्रशांत राही समेत चार लोगों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने साक्ष्यों के सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया है। इस दौरान प्रशांत राही ने न्यायालय में अपनी उपस्थिति वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से दी।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण पटवा ने बताया कि 20 दिसंबर 2007 को नानकमत्ता थाने में एलआईयू निरीक्षक बीएल मधवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें प्रशांत सांगलिकर उर्फ प्रशांत राही, खीम सिंह बोरा, देवेंद्र चम्याल और गोपाल भट्ट को नामजद किया गया था। इन सभी पर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप था।

22 दिसंबर को प्रशांत राही को पुलिस ने सितारगंज क्षेत्र के जंगल एरिया हंसपुर खत्ता से एक झोपड़ी से गिरफ्तार कर लिया था। जहां पुलिस को एक लैपटॉप, सीडी व पेनड्राइव सहित दैनिक उपयोग के बर्तन बरामद हुए थे। उसके बाद पुलिस ने दीपक उर्फ दिनेश पांडे, गोपाल भट्ट और प्रशांत राही की पत्नी चंद्रकला को भी गिरफ्तार किया था। वर्ष 2008 में इस मामले में ट्रायल चला और 17 मार्च 2008 को आरोप पत्र दाखिल किया गया।

इस बीच 18 गवाह पेश किये गये। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रशांत राही व अन्य को बरी कर दिया है। वहीं बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एडी मैसी ने बताया कि साक्ष्य से आरोप सिद्ध नहीं होने के कारण अदालत ने प्रशांत राही, चंद्रकला, दिनेश पांडे व गोपाल भट्ट को आरोपों से बरी कर दिया है। उन्होंने बताया कि प्रशांत राही किसी अन्य मामलें में महराष्ट्र जेल में बंद है। जिसके कारण उनकी उपस्थिति वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। वहीं अन्य सभी कोर्ट में मौजूद थे।

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