Pakistan: सिंध में पानी की गंभीर किल्लत, नहरें खोलने के बाद भी लोगों को नहीं मिली राहत
इस्लामाबाद। पाकिस्तान का सिंध प्रांत पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहा है और सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (इरसा) की अनुमति से दो विवादास्पद लिंक नहरें खोली जाने के बावजूद स्थानीय लोगों को ज्यादा राहत नहीं मिल सकी है। स्थानीय समाचारपत्र ‘डान’ ने गुरुवार को यह जानकारी दी। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी …
इस्लामाबाद। पाकिस्तान का सिंध प्रांत पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहा है और सिंधु नदी प्रणाली प्राधिकरण (इरसा) की अनुमति से दो विवादास्पद लिंक नहरें खोली जाने के बावजूद स्थानीय लोगों को ज्यादा राहत नहीं मिल सकी है। स्थानीय समाचारपत्र ‘डान’ ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री शेरी रहमान ने सिंधु नदी में पानी की 60 प्रतिशत कमी को ‘बहुत खतरनाक’ बताते हुए कहा कि इससे सिंध प्रांत के लोगों के साथ-साथ इसकी कृषि और पशुधन को भी खतरा है। जल और बिजली विकास प्राधिकरण (वापडा) द्वारा संचालित चश्मा-झेलम (सीजे) लिंक नहर को मंगलवार को 958 क्यूसेक पानी के प्रवाह के साथ खोला गया था और बुधवार को उसे 2,000 क्यूसेक प्रदान किया गया।
पंजाब के सिंचाई विभाग द्वारा नियंत्रित तौंसा-पंजनाड (टीपी) लिंक नहर को बुधवार को 2,404 क्यूसेक के प्रवाह की अनुमति दी गई थी। सिंध के सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि तारबेला बांध में पानी के अपर्याप्त प्रवाह और सिंध के जल प्रवाह के लिए मांग पूरी नहीं होने के कारण इरसा के अध्यक्ष जाहिद जुनेजो सीजे नहर को खोलने के खिलाफ थे। उन्होंने दावा किया कि कोटरी बैराज का बहाव भी शून्य रहा और सबसे बढ़कर सिंध के मुख्यमंत्री से सीजे लिंक नहर खोलने की अनुमति नहीं मांगी गई थी।
उन्होंने कहा, “सीजे एक अंतरप्रांतीय नहर है और इसे इस तरह संचालित नहीं किया जा सकता है। इसे तभी खोला जा सकता है जब सिंध की जरूरत पूरी हो जाये और सिस्टम में अतिरिक्त पानी हो।” दोनों लिंक नहरें सिंध और इरसा के बीच विवाद का विषय रही हैं। सिंधु नदी प्रणाली में अपर्याप्त जल प्रवाह के कारण आजकल सिंध के बैराज पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। पानी की कमी के कारण पहले शुरूआती और अब पीक खरीफ सीजन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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